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Chaitra Navratri Vrat Rules 2026: केवल पहला और अष्टमी व्रत रखने वालों को इन बातों का रखना चाहिए खास ध्यान,जान लें उपवास की सही विधि

Chaitra Navratri Vrat Rules 2026: चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व है, जिसमें माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। कई लोग पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं, जबकि कुछ श्रद्धालु केवल पहला दिन और अष्टमी का व्रत रखते हैं। इसे

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Mar 10, 2026
Navratri First Day Vrat Rules|फोटो सोर्स- Chatgpt

Chaitra Navratri Vrat Rules 2026 In Hindi: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से 27 मार्च तक मनाई जाएगी और पहला दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ शुरू होता है। कई भक्त पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग केवल पहले दिन और अष्टमी का उपवास करते हैं। ऐसे में व्रत का पूर्ण फल पाने के लिए सही नियम और पूजा विधि जानना जरूरी माना जाता है। पंचांग के अनुसार 19 मार्च को घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06:52 से 07:43 तक है, जबकि इसके बाद अभिजीत मुहूर्त 12:05 से 12:53 बजे तक पूजा के लिए उत्तम रहेगा।

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पहले दिन ऐसे लें व्रत का संकल्प

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ व स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद हाथ में अक्षत, लाल फूल और जल लेकर मां दुर्गा के सामने व्रत और पूजा का संकल्प लें। संकल्प में यह भावना रखें कि आप नवरात्रि के पहले दिन और अष्टमी का व्रत रखकर मां दुर्गा की श्रद्धा से पूजा करेंगे। संकल्प के बाद घर के पूजा स्थान पर कलश स्थापना करें और संभव हो तो अखंड ज्योति जलाएं।

अखंड ज्योति और पूजा का महत्व

अगर अखंड ज्योति जलाना संभव न हो, तो सुबह और शाम पूजा के समय घी का दीपक अवश्य जलाएं। इन दिनों में घर का वातावरण शांत और पवित्र रखना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। नियमित रूप से मां दुर्गा के मंत्र, दुर्गा चालीसा या पाठ करना भी शुभ माना जाता है।

व्रत के दौरान खान-पान के नियम

व्रत रखने वाले लोग फल, दूध, मेवा और जूस का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना और सेंधा नमक से बने सात्विक पकवान भी खाए जाते हैं। नवरात्रि के दौरान गेहूं, चावल और दाल जैसे अनाज नहीं खाए जाते। साथ ही प्याज, लहसुन, मांस और शराब जैसी तामसिक चीजों से दूर रहना चाहिए।

अष्टमी और पारण की विधि

दुर्गाष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन कन्या पूजन और हवन का विशेष महत्व होता है। इसके बाद महानवमी या दशमी के दिन पारण करके व्रत पूरा किया जाता है। अलग-अलग जगहों पर पारण की परंपरा अलग हो सकती है, इसलिए अपने परिवार या क्षेत्र की परंपरा के अनुसार व्रत का समापन करना चाहिए।

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