मंत्री ने कहा कि हाथी सीमाएं नहीं पहचानते, लेकिन उन्हें वन क्षेत्रों में वापस भेजने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
कर्नाटक Karnataka के वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री ईश्वर खंड्रे ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष Human-wildlife conflict को कम करने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
मेंगलूरु के कादरी में नवनिर्मित वन मंडल के उप वन संरक्षक कार्यालय और डिविजनल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का उद्घाटन करने के बाद उन्होंने यह जानकारी दी।
मंत्री ने बताया कि विधान सभा और विधान परिषद दोनों क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए एक हाथी टास्क फोर्स Elephant Task Force का गठन किया जा रहा है और समस्या पर नियंत्रण के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण और वन संरक्षण के मामले में कर्नाटक एक आदर्श राज्य है। कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की कार्यप्रणाली समझाते हुए मंत्री ने बताया कि कोई भी नागरिक हेल्पलाइन नंबर 1926 पर शिकायत दर्ज करा सकता है, जो बेंगलूरु स्थित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से संचालित होता है। प्राप्त शिकायतों को संबंधित वन क्षेत्र में भेजा जाता है, जिसके बाद रेंज वन अधिकारी और सहायक वन संरक्षक मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन करते हैं।स्थिति की समीक्षा के बाद यह तय किया जाता है कि हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ा जाए, उनका स्थानांतरण किया जाए या किसी उपद्रवी हाथी को पकड़ा जाए। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है।
सुल्लिया तालुक के मांडेकोलु क्षेत्र में हाथियों के गांवों में प्रवेश की बढ़ती घटनाओं का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि हाथी सीमाएं नहीं पहचानते, लेकिन उन्हें वन क्षेत्रों में वापस भेजने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि कुद्रेमुख क्षेत्र में जंगलों के भीतर रह रहे लोगों के पुनर्वास के लिए एक परियोजना तैयार की गई है और इसे लागू करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।