सरसों की सरकारी खरीद अब दस अप्रेल से और पंजीयन एक से शुरू करने का दावा, खरीद में विलम्ब से होगा किसानों को नुकसान, जल्दी पंजीयन व खरीद की मांग अनसुनी, पहले 20 मार्च से पंजीयन शुरू करने का किया गया था दावा, अब एक से पंजीयन शुरू करने की बात
हनुमानगढ़. सरसों की आवक मंडियों में शुरू हो चुकी है जो जल्दी ही रफ्तार पकड़ लेगी। सरसों के समर्थन मूल्य और बाजार भाव में 400 रुपए प्रति क्विंटल से भी ज्यादा का अंतर है मतलब कि बाजार में फसल विक्रय से किसान को प्रति क्विंटल इतना नुकसान होगा। इसके बावजूद सरसों की समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद के लिए पंजीयन प्रक्रिया भी शुरू नहीं की जा सकी है।
एक अप्रेल से पंजीकरण और दस अप्रेल से खरीद शुरू करने का दावा किया जा रहा है। इस दावे पर सरकारी तंत्र कितना खरा उतरेगा यह अगले सप्ताह पता चल जाएगा। क्योंकि पहले यह दावा किया गया था कि सरसों खरीद वास्ते किसानों के पंजीकरण के लिए 20 मार्च से पोर्टल खुल जाएगा और एक अप्रेल से खरीद शुरू हो जाएगी। मगर ऐसा कुछ नहीं हो सका। जबकि किसान संगठन निरंतर यह मांग कर रहे थे कि पंजीकरण प्रक्रिया मार्च के तीसरे सप्ताह में ही शुरू कर दी जाए और खरीद भले ही एक अप्रेल से शुरू करो। क्योंकि पंजीयन के बाद किसान को फसल खरीद को लेकर तसल्ली हो जाती है। गौरतलब है कि गेहंू खरीद के लिए पंजीयन प्रक्रिया बहुत पहले प्रारंभ हो चुकी है।
भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष प्रतापसिंह सुडा बताते हैं कि निरंतर मांग के बावजूद सरसों की सरकारी खरीद के लिए पंजीयन प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है। पहले 20 मार्च और अब अधिकारी कह रहे हैं कि एक अप्रेल से पंजीयन शुरू करेंगे। सरकारी खरीद में विलम्ब नहीं होना चाहिए, इससे किसानों को बहुत नुकसान होता है। प्रत्येक किसान से उसकी तय उपज की खरीद सुनिश्चित करने की मांग को लेकर जल्दी ही जिला कलक्टर से मिलेंगे। प्रति किसान 40 क्विंटल अधिकतम सीमा को 50 क्विंटल करने की मांग भी निरंतर उठा रहे हैं।
इस साल सरसों का समर्थन मूल्य 5950 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। जबकि सोमवार को जंक्शन धान मंडी में सरसों का बाजार भाव 5525 से 5600 रुपए प्रति क्विंटल रहा। मतलब कि 400 रुपए से भी ज्यादा का अंतर रहा। किसान से एमएसपी पर सरसों खरीद में विलम्ब हो और वह बाजार भाव पर बेचे तो प्रति क्विंटल उसे उपरोक्त नुकसान उठाना पड़े।
जिले में सरसों की सरकारी खरीद के लिए ग्राम सेवा सहकारी समितियों एवं क्रय विक्रय सहकारी समितियों में 19 केन्द्र बनाए गए हैं। इस बरस भी 40 क्विंटल सरसों ही प्रति किसान से अधिकतम खरीद की जानी है। गौरतलब है कि सरसों की बिजाई लगभग एक लाख 70 हैक्टेयर में हुई है।