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चैटबॉट से टूर गाइड तक, पर्यटन में एआइ की नई छलांग

पर्यटन की दुनिया तेजी से बदल रही है। पहले गाइड, फिर ऑडियो टूर डिवाइस और उसके बाद मोबाइल एप्स… और अब बारी है स्मार्ट एआइ टूर गाइड की।

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पर्यटन की दुनिया तेजी से बदल रही है। पहले गाइड, फिर ऑडियो टूर डिवाइस और उसके बाद मोबाइल एप्स… और अब बारी है स्मार्ट एआइ टूर गाइड की। तकनीक की यह नई छलांग पर्यटकों के अनुभव को न सिर्फ सरल बना रही है, बल्कि उसे ज्यादा व्यक्तिगत, भाषाई रूप से स्थानीय और रियल टाइम बना रही है। भारत में यह बदलाव विशेष रूप से असरदार है, जहां पर्यटक हिंदी सहित अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में जानकारी पाना पसंद करते हैं। भाषा अब पर्यटन में बाधा नहीं, बल्कि नई सम्भावना है। एआइ ने इसे संभव बनाया है और आने वाले वर्षों में यह डिजिटल गाइडिंग भारत के पर्यटन मानचित्र को नई दिशा देगी।

हिंदी में स्मार्ट टूर गाइड—रियल टाइम में जानकारी

अब कोई भी पर्यटक किसी ऐतिहासिक स्थल पर जाते हुए अपने फोन पर सिर्फ यह पूछ सकता है—यह दुर्ग कब बना? या यहां से पटवा हवेली कितनी दूर है? और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तुरंत जवाब देने लगता है। स्मार्ट एआइ की यही खासियत उसे पारंपरिक मॉडल्स से अलग करती है। वह न सिर्फ इतिहास बताता है, बल्कि वास्तु शैली, मार्ग-सूचना, टिकट, खुलने-बंद होने का समय, कैफे-रेस्टोरेंट तक के सुझाव और रियल टाइम भीड़, मौसम और यात्रा रूट भी अपडेट करता है। भारतीय पर्यटक और भाषा की दूरी खत्म। एक अनुमान के अनुसार देश में घरेलू पर्यटकों का वार्षिक आंकड़ा करोड़ों में है। इनमें बड़ी संख्या हिंदी भाषी है, जिनके लिए अब जानकारी खोजना आसान हो रहा है। पहले अंग्रेजी आधारित गाइड बुक्स और ऐप्स आम पर्यटक की पहुंच से बाहर लगते थे। अब हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में तकनीकी रूपांतरण ने संवाद में मौजूद वर्षों पुरानी दूरी तोड़ी है।

टूर गाइड का नया स्वरूप—डिजिटल व स्थानीय का संयोजन

नया मॉडल पूरी तरह कॉम्बिनेशन वाला है—कृत्रिम बुद्धिमत्ता की डेटा क्षमता और स्थानीय समझ के मेल से बना। जैसे जैसलमेर दुर्ग, दिल्ली का लाल किला, जयपुर का सिटी पैलेस, वाराणसी के घाट या हम्पी के स्मारक—अब हर जगह एआइ आधारित गाइडिंग की तकनीक लागू हो रही है। खास बात यह है कि यह पर्यटक की रुचि के आधार पर कंटेंट मॉडिफाई भी कर देता है—कोई वास्तु में रुचि रखता हो, कोई संस्कृति में या कोई खान-पान में।

एक्सपर्ट व्यू: पर्यटन की अर्थव्यवस्था होगी मजबूत, रोजगार में भी मदद

टेक स्ट्रेटेजिस्ट व पर्यटन विश्लेषक सुमेरसिंह राजपुरोहित बताते हैं कि पर्यटन में एआइ की एंट्री सिर्फ सुविधा का मामला नहीं, बल्कि एक मार्केट क्रांति है। भाषा आधारित एआइ गाइड से टूरिज्म सेक्टर की इकोनॉमी, रोजगार और कंटेंट इंडस्ट्री तीनों मजबूत होंगे। भविष्य में यह टेक्नोलॉजी संवर्धित वास्तविकता यानी एआर से जुड़कर अधिक तल्लीन करने वाला अनुभव देगी। उनके अनुसार भारत में एआइ आधारित गाइडिंग का सबसे बड़ा लाभ यह है कि पर्यटक खुद निर्णय ले पाता है कि उसे क्या सुनना या जानना है। इसका असर छोटे शहरों और कम लोकप्रिय स्थलों पर भी दिखेगा। अधिक जानकारी का मतलब अधिक फुटफॉल और अधिक आर्थिक लाभ।