समाचार

एक कार्ड खोलता है गंभीर बीमारी का राज, क्या है सिकल सेल और क्यों आदिवासियों को बनाती शिकार

Sickle Cell Disease: मध्य प्रदेश समेत ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और महाराष्ट्र के आदिवासी क्षेत्र इस गंभीर बीमारी का गढ़ हैं, जहां लाखों लोग इस चुनौतीपूर्ण स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं। एक संक्रामक रोग नहीं, बल्कि आनुवांशिक यह बीमारी जिसमें एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुंच जाते हैं HBB जीन, लेकिन हैरानी की बात कि इसके लक्षण नहीं दिखते, दिखाई भी देंगे तो बहुत समय बाद, या फिर स्क्रीनिंग के बाद ही पता चल सकता है कि कोई सिकल सेल एनिमिया से पीड़ित है या उसका वाहक है...बड़ा सवाल ये कि आदिवासी क्षेत्रों में ही क्यों सबसे ज्यादा पाई जाती है सिकल सेल जैसी बीमारी?

8 min read
Jun 20, 2026
Sickle cell disease in India
Sickle cell disease in India: सिकल सेल गंभीर बीमारी, जागरूकता ही दिला सकती है मुक्ति। (फोटो सोर्स: AI Generated)

Sickle Cell Disease: सिकल सेल बीमारी से जुड़े अध्ययन बताते हैं कि यह बीमारी स्वास्थ्य के क्षेत्र में सबसे बड़ी और गंभीर चुनौती है। बड़ा सवाल ये भी है कि ये बीमारी क्यों आदिवासियों को ही सबसे ज्यादा शिकार बनाती है? क्यों आदिवासी परिवारों की पीढ़ियां इसका प्रकोप झेल रही हैं? एक सिकल सेल एनीमिया सर्वाइवर और एक सामुदायिक चिकित्सा केंद्र की डॉक्टर की बातें बताती हैं कि सिकल सेल जैसी गंभीर स्वास्थ्य चुनौती से लड़ना अब आसान है। इससे जीता जा सकता है। लेकिन चुनौतियां बड़ी हैं। patrika.com पर संजना कुमार की खास पेशकश…

केस -

'मैं जब 6-7 साल की थी, तब डायग्नोस हुआ कि मैं सिकल सेल एनिमिया से पीड़ित हूं। और जब मैं एमबीबीएस कर रही थी, तब पता चला मेरे सारे परिवार को यह गंभीर बीमारी है। मुझे राज्य सरकार की योजना के तहत फ्री में इसकी दवाइयां और जांच समेत सभी जरूरी सुविधाएं मिलती है। जागरूकता, फिजिकल एक्टिविटीज, योग और ध्यान के साथ ही नियमित रूप से जांच इलाज जरूरी है। अपनी दिनचर्या को अनुशासित तरीके से जीते हुए समय पर और नियमित दवाएं लेते हुए मैं आज इस बीमारी पीड़ित नहीं बल्कि, एक सर्वाइवर हूं, आपको भी सर्वाइवर बनना चाहिए, पीड़ित नहीं।

-पीड़ित युवती, आदिवासी क्षेत्र, मध्य प्रदेश

डॉक्टर क्या कहते हैं?

ये आनुवांशिक बीमारी है, जो एक पीढ़ी से दूसरी में जाती है। इसके लिए नियमित दवाइयां जरूरी हैं। योग, ध्यान, एक्सरसाइज करें। पॉजिटिव थॉट के साथ आप एक अनुशासित लाइफ जीते हुए एक सर्वाइवर बनकर इससे लड़ा जा सकता है। जिनमें ये रोग जन्मजात है उसे रोक पाना संभव नहीं, लेकिन आने वाली पीढ़ियों में यह न पहुंचे इसके लिए जरूर युद्ध स्तर पर प्रयास जारी हैं।
-डॉ. सामुदायिक केंद्र अधिकारी, आदिवासी क्षेत्र, मध्य प्रदेश।

what is Sickle Cell disease: सिकल सेल बीमारी को ऐसे समझना होगा आसान। (फोटो सोर्स: AI Generated Infographic)

सबसे पहले जानें क्या है सिकल सेल बीमारी?

सिकल सेल रोग (SCD) नामक यह गंभीर बीमारी एक आनुवांशिक बीमारी है। यह एक प्रकार का रक्त विकार है। इसमें लाल रक्त कोशिकाएं सी आकार की हो जाती हैं। ठीक वैसे ही जैसे आधा चंद्रमा या हंसिया होता है। ये हंसियानुमा रक्त कोशिकाएं आपस में चिपक सकती हैं और ऊतकों के साथ ही शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन के पहुंचने में रुकावट पैदा कर सकती हैं। ऐसा होने पर दर्द के दौरे पड़ सकते हैं और कई जानलेवा समस्याएं हो सकती हैं।

दरअसल सिकल सेल रोग में आपके शरीर में ऐसे HBB जीन की दो कॉपियां माता-पिता से विरासत में मिलती हैं, जो हीमोग्लोबिन का एक ऐसा रूप बनाती हैं, जो सही तरीके से काम नहीं कर पाता। हीमोग्लोबिन खून का वह हिस्सा होता है, जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बनाए रखता है। लेकिन जब यही प्रभावित होता है तो ऑक्सीजन का प्रवाह बाधित होता है।

normal cells and sickle cells difference: सिकल सेल होने पर इस तरह हंसिया या आधे चंद्रमा की तरह आकार बना लेती हैं सामान्य ब्ल्ड सेल्स। (फोटो सोर्स: AI Generated infographic)

किसी भी उम्र में नजर आ सकते हैं लक्षण

इसके लक्षण किसी भी उम्र में शुरू हो सकते हैं। खासतौर पर शिशुओं में 5-6 महीने की उम्र में इसके लक्षण नजर आने लगते हैं। इन लक्षणों में छोटे बच्चों को बार-बार दर्द होना, एनिमिया की शिकायत होना, खून के थक्के और स्ट्रोक जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

वहीं आम तौर पर ज्यादा उम्र में दिखने वाले लक्षणों में पीठ, पैरों, हाथों और कभी-कभी छाती में तेज दर्द के दौरे से पड़ते हैं। व्यक्ति ज्यादातर थकान महसूस करता है। शरीर में पीलापन, कमजोरी, आखों और त्वचा का सफेद भाग पीला पड़ जाता है। सामान्य भाषा में पीलिया हो जाता है। जोड़ों में सूजन, हाथ-पैरों में सूजन जैसी जटिलताएं नजर आती हैं। वहीं ये लक्षण बार-बार नजर आएं ऐसा भी जरूरी नहीं है।

Sickle Cell Card: सिकल सेल कार्ड बता देता है बीमारी का हाल। (फोटो सोर्स: AI generated Infographic)

कितने प्रकार का होता है ये गंभीर रोग

1- सिकल सेल बीमारी का एक प्रकार है हीमोग्लोबिन एसएस (HBSS)। इस तरह के सिकल सेल रोग होने का अर्थ है कि आपके शरीर में HBB जीन की दो कॉपियां हीमोग्लोबिन S बनाती हैं। इसे सिकल सेल एनिमिया का गंभीर रूप माना जाता है। इसे सिकल सेल एनीमिया भी कहा जाता है।

2- सिल सेल के दूसरा प्रकार है हीमोग्लोबिन SC। इस रूप में आपके शरीर में HBB जीन की एक कॉपी ही हीमोग्लोबिन S बनाती है। यह असामान्य प्रकार का हिमोग्लोबिन C बनाती है। Hbacआमतौर पर हल्के से मध्यम लक्षण दिखा सकता है।

Sickle Cell Disease in India: देशभर में सबसे ज्यादा मरीज मध्य प्रदेश और उड़िसा के हैं। यह संख्या आदिवासी क्षेत्रों में काफी ज्यादा है। (फोटो सोर्स: AI Generated Info-graphic)

3- सिकल सेल रोग का तीसरा रूप है सिकल सेल बीटा थैलेसीमिया। यदि किसी को Hbs या बीटा-थैलेसीमिया या हीमोग्लोबिन S बीटा थैलेसीमिया है, तो उसके पास एक हीमोग्लोबिन S जीन है। वहीं उसके दूसरे HBB जीन में बीटा थैलेसीमिया का एक प्रकार है, जिसकी वजह से हीमोग्लोबिन का स्तर काफी कम हो सकता है।

4- SCD सिकल सेल रोग का चौथा और कई दुर्लभ रूप है। यदि यह किसी को है तो उसके शरीर में एक ही हीमोग्लोबिन S जीन और एक HBB जीन हो सकता है, जो अन्य प्रकार का असामान्य हीमोग्लोबिन जैसे D,E,O बनाता है। यही संयोजन इसे सिकल सेल का SCD के दुर्लभ रूप होते हैं। इनमें HbSD, HbSE, HbSO रूप शामिल हैं।

क्यों पड़ी अभियान की जरूरत

इस जरूरत पर शहडोल स्थित सामुदायिक केंद्र की स्वास्थ्य अधिकारी का कहना है कि दरअसल लोगों को यह पता ही नहीं है कि उन्हें कोई बीमारी है या फिर उन्हें पता है कि उन्हें बीमारी है, उनके पास कार्ड भी है लेकिन वे नहीं जानते कि उन्हें क्या बीमारी है। ज्यादातर लोगों में जागरूकता नहीं है, इसके कारण यह बीमारी उनकी पीढ़ियों में उतरती जा रही है। ऐसे में इस बीमारी से निपटने की जंग जागरूकता है। जब तक लोग जागरूक नहीं होंगे। तब तक इससे हम नहीं जीत पाएंगे।

क्यों खतरनाक है ये बीमारी

जो बीमारी पीढ़ियों को अपना निशाना बनाए वह खतरनाक ही तो कही जाएगी। इस बीमारी से पीड़ित या वाहक माता-पिता जागरूकता के अभाव में ऐसे बच्चों को जन्म देते हैं, जो सिकिल सेल रोग के लिए जिम्मेदार HBB जीन की एक या दो कॉपी साथ लेकर जन्म लेते हैं। इस तरह के रोगों से भावी पीढ़ियों की सेहत पर खतरा मंडराएगा ही। उनका भविष्य सुधारने के लिए उनके सर्वांगीण विकास के लिए जरूरी है कि इस बीमारी की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए इसके निवारण के उपाय किए जाएं, हर संभव प्रयास किए जाएं।

शादी के लिए कुंडली नहीं, सिकल सेल कार्ड मिलाए जाते हैं

इस बीमारी को पीढ़ियों तक पहुंचने के लिए एक अहम कदम उठाया गया। मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने विश्व सिकल सेल जागरूकता दिवस 2026 पर ओंकारेश्वर में लोगों को एक बार फिर जागरूक करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि बार-बार में कहता हूं कि सिकल सेल से रोग से पीड़ित व्यक्ति आपस में शादी न करें। उन्होंने कहा कि सिकल सेल कार्ड इसीलिए बांटे गए हैं कि विवाह से पहले कुंडली नहीं सिकल सेल कार्ड मिलाए जाए, ताकि ये स्वास्थय्य को लेकर यह गंभीर चुनौती जड़ से खत्म की जाए और भावी पीढ़ियां सुरक्षित रह सकें। बता दें कि मध्य प्रदेश में आदिवासी अंचलों में जागरूक हुए परिवार पहले सिकल सेल कार्ड देखते हैं उसके बाद ही शादी करते हैं।

जरूरी फैक्ट

बता दें कि भारत में सबसे ज्यादा आदिवासी आबादी वाला राज्य मध्य प्रदेश है। 2011 की जनगणना के मुताबिक मध्य प्रदेश में आदिवासियों की कुल जनसंख्या 1.53 करोड़ से भी ज्यादा है। यह संख्या राज्य की कुल आबादी का करीब 21.1% है। दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र आता है। यहां 1.05 करोड़ आदिवासी निवास करते हैं। तीसरा नंबर ओडिशा का है यहां 95.9 लाख की आबादी आदिवासियों की है। यदि राज्य की कुल आबादी में आदिवासियों की कुल संख्या की बात की जाए तो, पूर्वोत्तर का मिजोरम देश का ऐसा राज्य है जो 94.4% संख्या के साथ नंबर वन पर आता है। जबकि केंद्र शासित राज्यों की बात की जाए तो लक्षद्वीप नंबर वन पर है। यहां कुल आबादी पर आदिवासियों की संख्या 94.8 फीसदी है।

ज्यादातर आदिवासियों में ही क्यों हो रही ये गंभीर बीमारी

आदिवासी परिवारों में अपने नाते-रिश्तेदारों में ही विवाह की परम्परा निभा रहे हैं। ये बड़ा कारण है कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में इस गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों का आंकड़ा ज्यादा है। देशभर में एम्स समेत कई संस्थानों के अध्ययनों से पता चलता है कि आदिवासी परिवार इस बीमारी को लेकर जागरूक नहीं है। कई तो ऐसे हैं जिनके पास कार्ड भी है, लेकिन वे तब भी इस बीमारी की गंभीरता को नहीं समझ पाते। कई इसका नाम तक नहीं जानते। ये बडा़ कारण है कि यह बीमारी आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

वैज्ञानिकों की मानें तो सिकल सेल जीन सदियों पहले मलेरिया प्रभावित इलाकों में एक प्रकार की प्राकृृतिक अनुकूलन प्रक्रिया के रूप में विकसित हुआ था। जिन लोगों में सिकल सेल ट्रेट होता है, उनमें मलेरिया से कुछ हद तक सुरक्षा देखी गई। वे गंभीर स्थिति या मौत के मुंह में जाने से बच गए। इसके विपरीत नॉर्मल लोगों में मलेरिया के कारण ज्यादा गंभीर असर और मौतें देखी गईं। यही कारण है कि आदिवासी क्षेत्रों में यह जीन डेवलपमेंट प्रक्रिया पीढ़ियों तक चली आ रही है, इसके अलावा उसी समुदाय के लोगों में आपस में विवाह के कारण ये जीन उनसे होने वाले बच्चों में आते हैं और सिकल सेल का खतरा दोगुना कर देते हैं। ऐसा होने पर ये बीमारी पीढ़ी दर पीढ़ी बनी रहती है।

मध्य प्रदेश में चार स्तरों पर हो रहा काम, अब तक सवा लाख लोगों की स्क्रीनिंग

मध्य प्रदेश सरकार सिकल सेल उन्मूलन अभियान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस बीमारी से लड़ने के लिए सरकार अस्पताल के अलावा 4 अलग-अलग मोर्चों पर काम कर रही है।

खुद सीएम डॉ. मोहन यादव के मुताबिक हम चार मोर्चों पर काम कर रहे हैं। विवाह पूर्व जेनेटिक या सिकल सेल कार्ड मिलान के साथ काउंसलिंग करना, स्क्रीनिंग कर समय रहते रोग की पहचान करना और उपचार देना, प्रबंधन की समुचित व्यवस्था बनाए रखना, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से जनजागरूकता अभियान चलाना। मध्य प्रदेश सरकार के इन प्रयासों का ही नतीजा है कि 2027 तक तय किए गए स्क्रीनिंग के लक्ष्य को सरकार ने समय से पहले ही प्राप्त कर लिया। 2023 से अब तक यानी तीन साल में 1.32 करोड़ लोगों की सिकल सेल संबंधित स्क्रीनिंग की जा चुकी है। जो मामले सिकल सेल के मिले हैं, उन्हें सरकार की ओर से सारी सुविधाएं और इलाज मुहैया करवाया जा रहा है।

President Draupadi Murmu in Omkareshwar MP: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, सिकल सेल उन्मूलन अभियान पर संबोधित करते हुए। (फोटो सोर्स: dr mohan yadav X handle)

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विश्व सिकल सेल जागरूकता दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में आयोजित सिकल सेल उन्मूलन अभियान के जागरूकता कार्यक्रम में बताया कि देशभर के 17 राज्य ऐसे हैं, जहां स्क्रीनिंग से संबंधित कार्य किए जा चुके हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश के ऐसे कार्यक्रम और ऐसे प्रयास देशभर की ऐसी गंभीर बीमारियों के लिए किए जा रहे प्रयासों में सबसे बड़ी पहलों में से एक है।

बता दें कि सिकल सेल जैसी गंभीर बीमारी को देशभर से खत्म करने के लिए देशभर में 2023 में पीएम नरेंद्र मोदी ने सिकल सेल उन्मूलन अभियान की शुरुआत मध्य प्रदेश के शहडोल जिले से की थी। इसे केंद्र की भाजपा सरकार अमृत काल का मिशन मानती है। इस अभियान के तहत लक्ष्य रखा गया कि 2047 तक देश सिकल सेल मुक्त देश बन जाएगा। इस अभियान के तहत तीन साल में 17 राज्यों के 278 जिलों में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाते हुए जागरूकता के स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिसकी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी प्रशंसा की है। वहीं उन्होंने उम्मीद जताई है कि सरकारें अपने ऐसे गंभीर प्रयास नियमित रूप से करेंगी, तो 2047 तक भारत सिकल सेल के खिलाफ जंग जरूर जीत जाएगा।

Updated on:
19 Jun 2026 09:51 pm
Published on:
20 Jun 2026 07:00 am