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Ahoi ashtami 2018: पुत्र की सलामती के लिए इस दिन महिलाएं करेंगी अहोई माता की पूजा, जाने पूजा करने की विधि

Ahoi Ashtami 2018 kab hai shubh muhurt vrat and puja vidhi in hindi Ahoi ashtami 2018: Karwa Chouth (करवा चौथ) के चार दिन बाद होती है अहोई माता की पूजा, पुत्र की सलामती के लिए रखते हैं Ahoi ashtami व्रत

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Oct 20, 2018
Ahoi ashtami 2018: पुत्र की सलामती के लिए इस दिन महिलाएं करेंगी अहोई माता की पूजा, जाने पूजा करने की विधि

Ahoi Ashtami 2018 kab hai shubh muhurt vrat and puja vidhi in hindi

नोएडा। भारत में त्योहारों और व्रत का सिलसिला चल रहा है। दशहरा बीत चुका है और अब Karwa Chouth की तैयारियां की जा रही हैं। लेकिन करवा चौथ के साथ ही महिलाएं अहोई अष्टमी Ahoi ashtami की भी तैयारी में जुट गई हैं। अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन किया जाता है। इस बार अहोई अष्टमी 31 अक्टूबर को है। पुत्रवती महिलाओं के लिए यह व्रत अत्यन्त महत्वपूर्ण है। माताएं अहोई अष्टमी के व्रत में दिन भर उपवास रखती हैं और सायंकाल तारे दिखाई देने के समय होई का पूजन किया जाता है। तारों को करवा से अर्घ्य भी दिया जाता है।

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कैसे करें Ahoi ashtami का व्रत-

पुत्रवति महिलाएं सुबह उठकर स्नान करें। अहोई अष्टमी में माता पार्वती की पूजा होती है। इसलिए अहोई माता की पूजा के लिए गेरू से दीवाल पर या कपड़े पर अहोई माता Ahoi Maaका चित्र बनायें और साथ ही स्याहु और उसके सात पुत्रों का चित्र बनायें। प्रसाद के रुप में चावल की कटोरी, मूली, सिंघाड़े रखते हैं और सुबह दिया रखकर कहानी कही जाती है। कहानी कहते समय जो चावल हाथ में लिए जाते हैं, उन्हें साड़ी/ सूट के दुप्पटे में बांध लेते हैं।

अहोई माता की पूजा करते समय लोटे में पानी और उसके ऊपर करवे में पानी रखते हैं। लेकिन ध्यान रहे यह करवा, करवा चौथ में इस्तेमाल हुआ होना चाहिए। इस करवे का पानी दिवाली के दिन पूरे घर में छिड़का जाता है। संध्या काल में इन चित्रों की पूजा करें।

अहोई माता की पूजा में पके खाने में चौदह पूरी और आठ पूयों का भोग अहोई माता को लगाया जाता है। उस दिन बयाना निकाला जाता है - बायने मैं चौदह पूरी या मठरी या काजू होते हैं। लोटे का पानी शाम को चावल के साथ तारों को आर्ध किया जाता है। शाम को माता के सामने दिया जलाते हैं और पूजा का सारा सामान (पूरी, मूली, सिंघाड़े, पूए, चावल और पका खाना) पंडित जी को दिया जाता है। अहोई माता का कैलंडर Diwali दिवाली तक लगा रहना चाहिए। अहोई पूजा में एक अन्य विधान यह भी है कि चांदी की अहोई बनाई जाती है जिसे स्याहु कहते हैं। इस स्याहु की पूजा रोली, अक्षत, दूध व भात से की जाती है। पूजा चाहे आप जिस विधि से करें लेकिन दोनों में ही पूजा के लिए एक कलश में जल भर कर रख लें। पूजा के बाद अहोई माता की कथा सुने और सुनाएं। पूजा के बाद बड़ों का आशीर्वाद लें इसके बाद ही व्रती अन्न जल ग्रहण करें।

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Published on:
20 Oct 2018 01:38 pm
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