Akhilesh Yadav vs Keshav Prasad Maurya : डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव की दादरी रैली को 'फ्लॉप' बताया, तो सपा प्रमुख ने भी तीखा पलटवार किया। अखिलेश ने 'मर्सी पोस्टिंग' और 'प्लास्टिक की कुर्सी' का जिक्र कर केशव मौर्य पर कसा तंज।
अखिलेश यादव और केशव प्रसाद मौर्य के बीच जुबानी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। केशव प्रसाद मौर्य ने दादरी की समाजवादी पार्टी की रैली को लेकर बयान दिया। इसके बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर डिप्टी सीएम पर निशाना साधा।
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव की दादरी रैली को लेकर कहा कि उनकी दादरी में फ्लॉप रैली थी। वह यहां खोने के लिए आए थे और खोकर चले गए। वह 2027 में सरकार बनाने के लिए आए थे लेकिन, 2047 तक वह पीछे खिसक गए। डिप्टी सीएम ने आगे कहा कि पश्चिमी यूपी का चाहे जाट समाज हो, गुर्जर समाज हो या अगड़ा हो या पिछड़ा हो सभी भाजपा के साथ हैं। तीसरी बार ऐतिहासिक रूप से भाजपा की सरकार यूपी में बनने जा रही है।
जनता द्वारा हराये जा चुके जो लोग, अपने चुनाव का आकलन नहीं कर पाये, वो न ही बोलें तो उनका रहा-सहा मान-सम्मान बचा रहेगा। कृपा-दृष्टि से मर्सी पोस्टिंग पाये लोग जब बिन मांगे अपनी राय देते हैं तो उपहास का पात्र बन जाते हैं।
अगर इतने ही बड़े राजनीतिक विशेषज्ञ हैं तो ख़ुद ही वो जगह बता दें जहां ये पीडीए की ताक़त देखने ख़ुद आना चाहेंगे, ये वचन है कि हम उन्हें ससम्मान कुर्सी पर बैठाएंगे। अगर रिश्ता अच्छा हो और इच्छा हो तो उनसे भी पूछ लें (अगर कभी उनसे मिलना होता हो तो) जो न तो अपने से बड़ों को नमस्कार करते हैं, न इनके नमस्कार का जवाब देते हैं। उनको भी हम प्लास्टिक की कुर्सी पर कहीं पीछे नहीं बल्कि सम्मान सहित आगे बैठाएंगे। आज के लिए इतना पर्याप्त, पोस्ट समाप्त!
अखिलेश यादव ने भाजपा के प्रसिद्ध नारे 'आपदा में अवसर' की व्याख्या अपने अंदाज में करते हुए इसे भ्रष्टाचार का जरिया बताया। उन्होंने एक लंबी 'क्रोनोलॉजी' समझाते हुए कहा कि भाजपा पहले जनता को परेशान करती है, फिर किल्लत का भय पैदा कर लंबी लाइनें लगवाती है। जब जनता डर जाती है, तो पिछले दरवाजे से सप्लाई करवाकर और दाम बढ़ाकर कालाबाजारी के जरिए अकूत दौलत कमाई जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की सोच ही 'काला-कारोबारी' है।
सपा प्रमुख ने भाजपा और उनके अनुषांगिक संगठनों पर तंज कसते हुए कई सवाल दागे, दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी और 'सेवा' का दावा करने वाले भाजपाई अब संकट के समय कहां नदारद हैं? गैस और तेल की लाइनों में लगे लोगों की मदद के लिए भाजपाई अपने गले में पट्टा और गाड़ियों पर झंडा लगाकर क्यों नहीं निकल रहे? वे गैस एजेंसियों और पेट्रोल पंपों के बाहर 'स्टूल' लगाकर जनता की मदद के लिए क्यों नहीं बैठ जाते?