बसपा सुप्रीमो मायावती ने दिल्‍ली में बुलाई एक बैठक में कई नेताओं को इधर से उधर किया है
नोएडा। बसपा सु्प्रीमो मायावती ने संगठन में बड़ा बदलाव किया है। खास बातय यह है कि इनमें से ज्यादातर पश्चिमी उत्तर प्रदेश से संबंध रखते हैं। इनमें वेस्ट यूपी के बाबू मुनकाद अली, अशोक सिद्धार्थ, धर्मवीर अशोक और अतर सिंह राव शामिल हैं। माना जा रहा है कई नेताओं के पर कतरे गए हैं।
बैठक रद्द होने की भी चर्चा
बसपा सुप्रीमो मायावती ने दिल्ली में बुलाई एक बैठक में कई नेताओं को इधर से उधर किया है। यह भी बताया जा रहा है कि मेरठ में होने वाली 29 जुलाई की बैठक को भी कैंसल करवा दिया गया है। इस बैठक में वेस्ट यूपी के कार्यकर्ताओं को शामिल होना था। इसमें नेशनल कॉडिनेटर जय प्रकाश अौर वीर सिंह को शामिल होना था। फिलहाल दोनों को पदमुक्त कर दिया गया है। बैठक रद्द होने के पीछे यहीं वजह बताई जा रही है। बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर जयप्रकाश को पार्टी से निकाल दिया गया है।
मुनकाद अली को राजस्थान की भी जिम्मेदारी
सूत्रों के अनुसार, बसपा के राष्ट्रीय महासचिव व वेस्ट यूपी के कद्दावर नेता मुनकाद अली के पद में भी फेरबदल कर दिया गया है। वह पहले वेस्ट यूपी के मंडल प्रभारी थे। इसके बाद उन्हें पूर्वांचल का जिम्मा सौंप दिया गया था। फिलहाल उनके पास चार मंडलों का प्रभार था। अब देवीपाटन और श्रावस्ती की जिम्मेदारी उनसे ले ली गई है। वेस्ट यूपी के अलीगढ़ और आगरा मंडल को देखने के साथ ही उन्हें राजस्थान की जिम्मेदारी दे दी गई है।
वीर सिंह को नेशनल कॉर्डिनेटर पद से हटाया
इसके साथ ही राज्यसभा सदस्य वीर सिंह को नेशनल काॅर्डिनेटर के पद से हटा दिया गया है। बताया जा रहा है कि अब यूपी में उनका दखल खत्म कर दिया गया है। उनको केरल, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, पुडुचेरी और अंडमान निकोबार का प्रदेश प्रभारी बनाया गया है। वहीं, राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ काे भी कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी दी गई है।
धर्मवीर अशोक को दिल्ली से हटाया
एमएलसी धर्मवीर अशोक को भी राष्ट्रीय कार्यकारिणी से अलग कर दिया गया है। उनको दिल्ली से भी हटा दिया गया है। उनको राजस्थान और उड़ीसा की जिम्मेदारी दी गई है। बताया जा रहा है कि एमएलसी अतर सिंह राव का कद बढ़ा दिया गया है। उनको पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ का प्रभारी बनाया गया है जबकि उनके पास मध्य प्रदेश का जिम्मा पहले से ही था।