
नोएडा. नोएडा प्राधिकरण की 193वीं बोर्ड बैठक में बुधवार को शहर से संबंधित कई मुद्दों पर चर्चा की गई। हालांकि जैसा कि मीटिंग से पहले अनुमान लगाया जा रहा था कि इसमें अधिकारी शहरवासियों की समस्याओं को हल कर उन्हें नए साल का तोहफा दे सकते हैं, लेकिन इसमें ऐसा कुछ नहीं हुआ। किसान के मुद्दों के अलावा बिल्डर-बायर्स की समस्याओं की पूरी तरह से अनदेखी की गई। हालांकि प्राधिकरण के कर्मचारियों और अधिकारियों को सातवें वेतनमान के हिसाब से तनख्वाह देने के फैसले पर बोर्ड ने मोहर लगा दी है। इसके साथ ही चार हजार वर्ग मीटर से बड़े भूखंडों का आवंटन एक विशेष समिति करेगी। प्राधिकरण के दफ्तरों में उपयोग आने वाली वस्तुओं की खरीद के लिए भारत सरकार के ई-मार्केट पोर्टल की मदद प्राधिकरण लेगा।
नोएडा शहर को व्यवस्थित बनाए रखने और यहां के औधोगिक विकास को गति देने के लिए गठित नोएडा प्राधिकरण की संचालन समिति की बैठक लंबे अंतराल के बाद 27 दिसंबर को हो गई। प्राधिकरण द्वारा आवंटित परिसंपत्ति पर हर वर्ष अदा किए जाने वाले लीज रेंट को यदि कोई आवंटी एकमुस्त अदा करना चाहता है तो ये अधिकार उसे होना चाहिए। बोर्ड ने तय किया है कि हर साल जमा होने वाले लीज रेंट की पंद्रह गुना राशि आवंटी को एक साथ जमा करनी होगी। उसके बाद उसे 99 साल तक लीज रेट जमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस फैसले का लाभ शहर के लोगों को एक बार फिर से मिल सकेगा। पूर्व में एक मुश्त लीज रेंट जमा करने का फैसला प्राधिकरण के बोर्ड ने लिया था, लेकिन इसे बीच में कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया।
प्राधिकरण के अफसरों और कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के हिसाब से तनख्वाह मिलनी चाहिए। इस मुददे पर भी बोर्ड के सदस्यों ने एक राय जताई। इस फैसले पर प्राधिकरण की वेतन समिति 2016 में मोहर लगा चुकी है। अब प्राधिकरण अपनी कब्जा प्राप्त जमीन पर ही आवंटन पत्र जारी करेगा। यहां उघोगों को बढ़ावा देने के लिए चार हजार वर्ग मीटर तक के भूखंडों का आवंटन लाटरी के माध्यम से होगा। पहले दो हजार मीटर तक यह सुविधा लोगों को मिलती थी। चार हजार वर्ग मीटर से बडे भूखंडों का आवंटन स्क्रीनिग कमेटी करेगी। जबकि पांच एकड़ यानि पच्चीस बीघा जमीन से बडे भूखंडों का आवंटन प्राधिकरण की वेबसाइट पर आनलाईन हो सकेगा। इसके साथ ही बैक में ऑफलाइन भी इन भूखंडों के लिए आवेदन किया जा सकेगा। प्राधिकरण के संचालन मंडल ने तय किया है कि यहां के दफ्तरों के लिए होने वाले सामान की खरीद-फरोख्त अब भारत सरकार की ई-मार्केट पोर्टल से ही होगी। इसमें अब किसी की मनमानी नहीं चलेगी। बोर्ड बैठक में प्राधिकरण के अध्यक्ष आलोक टंडन के साथ ही संचालन मंडल के सभी सदस्य मौजूद थे।