Dussehra के दिन भगवान राम करते हैं रावण का वध, लेकिन श्रीराम भी मानते थे कि रावण जैसा दूसरा महापंडित और राजनीतिज्ञ नहीं होगा। इसलिए लक्ष्मण को भेजा था रावण से सीख लेने
नोएडा।Dussehra Special: Dussehra 2018: जब भी भगवान राम का जिक्र होताहै तो रावण Ravan का स्वत: ही आ जाता है। रामायण में रावण को परम प्रतापी, महान शिव भक्त के अलावा उसे घमंडी, लालची और जिद्दी बताया गया है। जिसकी वजह से वह उसने अपना सबकुछ खो दिया। लेकिन सोने की लंका में रहने वाले रावण की एक-एक गलती ने उसे उसके अंत की ओर धकेलते ले कर गई और अंत में श्री रामचंद्र जी ने उसका वध कर दिया। लेकिन ऐसा नहीं है कि रावण को अपनी गलतियों का एहसास नहीं था। वह जानता था की वह गलत है। लेकिन अपने जीद के आगे उसने कुद की भी नहीं सुनी। ये बात इससे साबित होती है जब मृत्यु शय्या पर पड़े रावण ने भगवान लक्ष्मण को कुछ ऐसा बताया जिसका जिक्र कम ही होता है। क्योंकि समय बितने पर पछताने से कुछ नहीं होता।
रावण जिसे पूरा विश्व राक्षस राजा के नाम से जानता है, वह एक महापंडित था। रावण प्रकांड पंडित होने के साथ ही नीति-राजनीति का ज्ञाता था। जब रावण मरणासन्न अवस्था में था, उस वक्त श्रीराम ने अपने भाई लक्ष्मण से कहा कि नीति, राजनीति और शक्ति का महान् ज्ञाता इस संसार से विदा ले रहा है, उसके पास जाओ और उससे जीवन की कुछ ऐसी शिक्षा ले लो जो और कोई नहीं दे सकता। भगवान राम भी जानते थे कि रावण जैसे ज्ञानी कोई दूसरा नहीं हो सकता है। राम की बात मान कर भगवान लक्ष्मण रावण के सिरहाने जाकर खड़े हो गए। लेकिन तब रावण कुछ नहीं बोला और वह उसी अवस्था में पड़ा रहा। ये देख लक्ष्मण जी वापस आ गए।
तब भघवान राम ने कहा कि यदि किसी से ज्ञान प्राप्त करना हो तो उसके चरणों के पास खड़े होना चाहिए न कि सिर की ओर। यह बात सुनकर लक्ष्मण जाकर इस रावण के पैरों की ओर खड़े हो गए। उस समय महापंडित रावण ने लक्ष्मण को तीन बातें बताई जो जीवन में सफलता की कुंजी है। लक्ष्मण जी दुबारा रावण के पास गए और इस बार पैर की ओर खड़े हुए। लक्ष्मण जी को पैर के आगे खड़ा देख रावण विह्वल हो गया और महापंडित रावण ने लक्ष्मण को तीन बातें बताई जो जीवन में सफलता की कुंजी है।
1-शुभ कार्य को टाल को नहीं चाहिए। जितना जल्दी हो सके शुभ काम कर लेना चाहिए। अगर देरी करेंगे तो परेशानी होगी या भविष्य में पछताना पड़ेगा।
2-अपने प्रतिद्वंद्वी या शत्रु को कभी भी छोटा नहीं आंको। ऐसा करेंगे तो आप हमेशा बेहतर करेंगे। कमतर आंकने पर आपको नुकसान उठाना पड़ेगा।
3-आखिरी बात यह कि अपना राज किसी को भी मत बताओ। रावण का राज विभीषण जानता था। इसी तरह यदि आप अपने राज बताओगे तो नुकसान उठाना ही पड़ेगा।