Heliport in Noida: हेलीपोर्ट के शुरू होते ही नोएडा सेक्टर-151ए में बन रहे इंटरनेशनल लेवल के गोल्फ कोर्स, हैबीटेट सेंटर जैसी परियोजनाओं को मानों विकास के पंख लग जाएंगे। साथ ही देश-विदेश से आने वाले मेहमान ट्रैफिक जाम में फंसे बिना सीधे नोएडा और ग्रेटर नोएडा आ-जा सकेंगे।
दिल्ली से सटे नोएडा शहर को यूपी सरकार (UP Government) जल्द ही एक बड़ी सौगात देने वाला है। जेवर एयरपोर्ट (Jewar Airport) की तरह अब यहां भी हेलीपोर्ट (Heliport in Noida) का निर्माण शुरू होने जा रहा है। इसके लिए सरकार की तरफ से हेलीपोर्ट से संबंधित ग्लोबल टेंडर जारी करने की अनुमति दे दी गई है। सिके बाद अनुमान जताया जा रहा है कि अगस्त में फाइनेंशियल बिड खोल दी जाएगी। जिसके बाद अगस्त में ही हेलीपोर्ट का काम शुरू हो जाएगा। आपको बता दें कि सेक्टर-151ए में हेलीपोर्ट बनाने की तैयारी चल रही है। यहां 9 एकड़ से भी ज्यादा जमीन पर हेलीपोर्ट बनाया जाएगा।
हेलीपोर्ट बनाने की लागत
आपको बता दें कि शहर में हेलीपोर्ट बनाने की लागत करीब 43 करोड़ रुपये आने की उम्मीद है। इसे बनाने का निर्माण कार्य पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर होगा। वहीं निर्माण करने वाली कंपनी ही 30 साल तक हेलीपोर्ट का संचालन करेगी। दरअसल तकनीकि बिड का ग्लोबल टेंडर जारी होने पर एक ही कंपनी ने दिलचस्पी दिखाई थी। वहीं हेलीपोर्ट पर एयर एम्बुलेंस (Air Ambulance) को उतारने के लिए भी जगह दी जाएगी। बता दें कि नोएडा अथॉरिटी ने यूपी सरकार से टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति मांगी थी। ऐसे में अनुमति मिलने के बाद अब अथॉरिटी फाइनेंशियल बिड की तैयारी में लग गई है।
हेलीपोर्ट से ये होगा फायदा
गौरतलब है कि हेलीपोर्ट के शुरू होते ही नोएडा सेक्टर-151ए में बन रहे इंटरनेशनल लेवल के गोल्फ कोर्स, हैबीटेट सेंटर जैसी परियोजनाओं को मानों विकास के पंख लग जाएंगे। हेलीपोर्ट बनने के साथ ही देश-विदेश से आने वाले मेहमान ट्रैफिक जाम में फंसे बिना सीधे नोएडा और ग्रेटर नोएडा आ-जा सकेंगे। यहां से यूपी उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के दर्शनीय स्थल जुड़ेंगे। वहीं आगरा, मथुरा, वृंदावन, हरिद्वार, केदारनाथ, गंगोत्री, शिमला, मनाली, देहरादून आदि को भी हेलीपोर्ट से जोड़ा जाएगा।
लगेगा एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर
हेलीपोर्ट को लेकर अथॉरिटी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण 500 वर्ग मीटर में कराया जाएगा। जिससे एक बार में हेलीपोर्ट से 20 सवारी रवाना और 20 जाने वाली सवारियों का संचालन हो सकेगा। इसके साथ ही हेलीपोर्ट पर 15 मीटर ऊंचा एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर लगेगा। हेलीपोर्ट पर ही 50 कारों के लिए पार्किंग, इलेक्ट्रिक सब स्टेशन, फायर स्टेशन भी बनाया जाएगा. जरूरत पड़ने पर यहां से एयर एंबुलेंस का भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।