
नोएडा। मां बहुत दयालु होती हैं और मां अपने भक्तों को कभी कष्ट में नहीं देख सकती हैं। इसलिए नवरात्रि के नौ दिन मां की सच्चे मन से पूजा करने पर वो प्रसन्न होती हैं। आज नवरात्रि का चौथा दिन है और भक्त आज मां के नौ रूपों में से चौथे रूप कूष्माण्डा की पूजा कर रहे हैं। पुराणों और धर्मशास्त्रों के मुताबिक जब सृष्टि का अस्तित्व भी नहीं था और चारो ओर अंधकार था, तब मां दुर्गा ने ब्रह्मांड की रचना की थी। अपनी मंद हल्की हंसी से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इनका नाम कूष्माण्डा पड़ा।
माँ कूष्माण्डा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक मिट जाते हैं। इनकी भक्ति से आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है। अगर आप अपने जीवन में घोर निराशा से गुजर रहे हैं और चारों-तरफ रास्ते बंद लग रहे हैं तो आप चतुर्थी के दिन कूष्माण्डा मां की विशेष रुप से पूजा करें। मां आपको सभी कष्टों से बाहर निकालेंगी।
चतुर्थी के दिन मां कूष्मांडा उपासना से सिद्धियों में निधियों को प्राप्त कर समस्त रोग-शोक दूर होकर आयु-यश में वृद्धि होती है। मान्यता है कि इस दिन प्रसाद में हलवा शुभ माना जाता है। मां की पूजा इन मंत्रों के साथ करें।
देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: