
नोएडा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ओर स्वच्छ भारत अभियान चला रहे हैं तो दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अफसर शहर को ही कूड़ेदान में तब्दील करने पर आमादा हैं। प्रदेश का एकमात्र नियोजित शहर नोएडा आज भी कूड़े के निस्तारण के मामले में खाली हाथ है। शहर को बसे 42 वर्ष हो गए, लेकिन प्राधिकरण के पास न तो सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट है, न ही कूड़े के लिए कोई स्थाई डंपिंग ग्राउंड। आलम यह है कि प्राधिकरण कूड़े के निस्तारण के लिए कोई वैज्ञानिक विधि भी नहीं अपना रहा है। खुले में डाला जा रहा कूड़ा पर्यावरण को प्रदूषित करने के साथ ही जमीन और भूजल को दूषित कर रहा है। लेकिन अब सेक्टर-123 में बन रहे डंपिंग यार्ड से पूरा शहर गुस्से में है और स्वास्थ्य को देखते हुए इसका विरोध कर रहा है।
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की योजना
दरअसल करीब एक दशक पहले नोएडा में कूड़ा निस्तारण के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने के बारे में योजना बनाई गई। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने के लिए कई शहरों में किए जा रहे काम का अध्ययन किया गया। हुडको नाम की संस्था को वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए कंसलटेंट एजेंसी के रूप में चुना गया। लेकिन कई शहरों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के अध्ययन और कई तकनीक पर विचार करने के बाद भी योजना फाइलों तक ही सिमट कर रह गई। नोएडा प्राधिकरण ने सबसे पहले सेक्टर-121 के पास सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने की तैयारी की थी। लेकिन, वहां की आवासीय सोसाइटी के लोगों के विरोध के कारण काम शुरू नहीं हो पाया। इसके बाद भी प्राधिकरण ने अपना प्रयास जारी रखा, लेकिन उसे पूरे क्षेत्र में कहीं भी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने के लिए जगह नहीं मिली।
कूड़े से बिजली बनाने की तकनीक पड़ी महंगी
कूड़े के निस्तारण के लिए सबसे पहले जिस तकनीक को चुना गया, उसमें करीब 60 प्रतिशत कूड़े का निस्तारण होना था। बाकी 40 प्रतिशत कूड़ा डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचाना था। डंपिंग ग्राउंड न होने के कारण इस तकनीक के तहत कार्य नहीं हो सका। इसके बाद कूड़े से बिजली बनाने की तकनीक को चुना गया। इस तकनीक से लगने वाले प्लांट के महंगा होने के कारण इस पर भी कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका। इसके बाद कूड़े को प्रवृति के हिसाब से अलग-अलग करके इसके निस्तारण की योजना बनाई गई। इस तकनीक के तहत सिर्फ पांच प्रतिशत कूड़ा डंपिंग ग्राउंड तक जाना था, लेकिन कूड़े को अलग करने के लिए लगने वाले प्लांट में अधिक जगह की जरूरत थी, ऐसे में यह योजना भी परवान नहीं चढ़ी।
जेवर एयरपोर्ट के पास होने के बाद संयुक्त प्लांट हुआ रद्द
अब से करीब पांच साल पहले नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लिए एक संयुक्त प्लांट लगाने की तैयारी की गई। उसके लिए अस्तौली में 125 एकड़ जमीन चिह्नित कर सड़क और चारदीवारी बना दी गई। बताया जाता है कि इसके लिए नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों के बीच एक एमओयू पर दस्तखत भी किए गए थे। सपा मजदूर सभा के अध्यक्ष देवेन्दर अवाना बताते हैं कि यह एमओयू अब तक निरस्त नहीं किया गया है। अस्तौली में प्रस्तावित प्लांट के वेस्ट टू एनर्जी तकनीक से लैस होने की बात की गई थी। उसमें कूड़े से बिजली के उत्पादन की योजना बनाई गई थी। बचे हुए कूड़े का प्रयोग सड़क बनाने में किया जाना था। उस समय ढाई वर्ष में इसे बनाकर चालू करने की बात कही गई थी। लेकिन जेवर एयरपोर्ट के पास होने के कारण वह योजना भी सियासी भंवर में फंस गई।
प्राधिकरण नहीं निकाल पया निस्तारण का हल
अपनी स्थापना से लेकर अब तक प्राधिकरण को जहां भी गड्ढा मिला, वहां कूड़ा डालना शुरू कर दिया गया। सबसे पहले सेक्टर-62 के लेबर चौक के पास कूड़ा डंप कर उसमें आग लगा दी जाती थी। इसका लोगों ने बहुत विरोध किया, लेकिन प्राधिकरण ने किसी की नहीं सुनी। आखिर, उस मैदान में खेल रहे कई बच्चे आग में फंसकर बुरी तरह झुलस गए। तब प्राधिकरण ने कूड़े को खोड़ा कालोनी के पास एनएच-24 के किनारे डालना शुरू किया। आरोप तो यह भी लगे कि प्राधिकरण चोरी से कूड़े को दिल्ली के गाजीपुर स्थित डंपिंग यार्ड में डालना शुरू किया। जिसके बाद दिल्ली के अधिकारियों ने नोएडा प्राधिकरण की गाड़ियों को जब्त कर सख्त एतराज जताया। उसके बाद कूड़े को सेक्टर-138 के इलाहाबांस गांव के पास डाला जाने लगा। लेकिन कुछ दिनों बाद यहां भी एनजीटी के आदेश पर प्राधिकरण ने नए स्थान की तलाश शुरू की। प्राधिकरण की यह करतूत हैरान करने वाला है कि जब उसे कहीं जगह नहीं मिली तो उसने सैक्टर-48 और सेक्टर-54 के फॉरेस्ट लैंड को ही डंपिंग ग्राउन्ड में तब्दील कर दिया। मई-2018 में ही नागरिकों के भारी विरोध, स्थानीय सांसद के हस्तक्षेप और एनजीटी के आदेश के बाद सेक्टर-54 में कूड़ा डालना बंद कर दिया गया।
वहीं अब सेक्टर-123 में डंपिंग यार्ड बनाया जा रहा है। इसका भी पुरजोर विरोध किया जा रहा है। क्योंकि यह आबादी के बीच में है। स्थानीय लोगों की डंपिंग ग्राउंड के विरोध में पुलिस और प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मंचारियों के साथ काफी नोकझोंक भी हुई। लोगों के विरोध को कई संगठनों और राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिल चुका है लेकिन प्राधिकरण इन सब को दरकिनार कर डंपिंग ग्राउंड का निर्माण कराने में लगा है।