नोएडा

उपचुनाव में भाजपा को लगा बड़ा झटका, निर्दलीय से बुरी तरह हारा पार्टी का यह प्रत्‍याशी

मुजफ्फरनगर की सभी 6 विधानसभा सीटों पर भाजपा के ही विधायक हैं और लोकसभा सीट से सांसद भी भाजपा के ही हैं

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Feb 26, 2018

नोएडा। केंद्र और उत्‍तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार होने के बावजूद उपचुनाव में पार्टी अपनी सीट नहीं बचा सकी। उसके प्रत्‍याशी को करारी शिकस्‍त मिली है। मुजफ्फरनगर में जिला पंचायत उपचुनाव में भाजपा समर्थित प्रत्याशी योगेंद्र कुमार को निर्दलीय प्रत्याशी सुभानी ने भारी मतों से हराया है। भाजपा के लिए इसे बड़ा झटका इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि मुजफ्फरनगर की सभी 6 विधानसभा सीटों पर भाजपा के ही विधायक हैं और लोकसभा सीट से सांसद भी भाजपा के ही हैं। इस सीट पर कई दिग्गजों की साख दांव पर लगी थी।

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निर्दलीय ने मारी बाजी

दरअसल, मुजफ्फरनगर के जिला पंचायत के वार्ड 35 सीट पर भाजपा प्रत्याशी व वर्तमान विधायक विक्रम सिंह सैनी ने जीत हासिल की थी। उनके विधायक चुने जाने के बाद यह खाली हो गई थी। इस सीट पर पूरे जनपद की निगाहें थी। चुनाव में जहां योगेंद्र कुमार को 3096 मत मिले हैं, वहीं निर्दलीय प्रत्याशी कवाल गांव के पूर्व प्रधान सुभानी ने 5485 वोट के साथ विजय हासिल की है।

विधायक की प्रतिष्‍ठा थी दांव पर
बता दें कि गुरुवार को हुए उपचुनाव में मतदान के बाद से ही लोगों ने हार और जीत के जोड़तोड़ शुरू कर दी थी। मगर नतीजे ऐसे आएंगे इसका किसी को भी अंदाजा नहीं था। अब देखना यह होगा कि इस सीट को हारने के बाद भाजपा में किस तरह की हलचल होती है। इस सीट पर विधायक विक्रम सिंह सैनी की भी प्रतिष्ठा लगी हुई थी, जो पूरी तरह से धराशायी हो गई। आपको बता दें कि जनपद मुजफ्फरनगर में हुए 2013 में सांप्रदायिक दंगों के बाद से भाजपा के नेता यह कहते दिखाई देते रहे हैं कि भाजपा जिले में कोई चुनाव नहीं हारी। मगर हाल ही में हुए निकाय चुनाव में भाजपा को जनपद में करारी हार मिली थी।

क्षेत्र के लोगों की जीत

वहीं, इस सीट पर जीत दर्ज करने वाले नवनिर्वाचित जिला पंचायत सदस्य सुभानी ने कहा कि उनकी जीत को क्षेत्र के लोगों की जीत है। सभी लोगों ने जाति धर्म को पीछे छोड़ते हुए मतदान किया है, जिससे उनकी जीत हुई है और वे उनकी कसौटी पर खरा उतरेंगे।

हिंदू-मुस्लिम एकता का नतीजा

उधर, मुजफ्फरनगर के जमीयत उलेमा-ए-हिंद के पदाधिकारी मौलाना नजर ने उपचुनाव की इस जीत को हिंदू-मुस्लिम एकता का नतीजा करार दिया। उन्‍होंने कहा कि जनपद में 2013 में हुए सांप्रदायिक दंगों के बाद जमीयत उलेमा-ए-हिंद और राष्ट्रीय लोकदल इस मुहिम को लेकर आगे बढ़े हैं। उसी के चलते कव्वाल के पूर्व प्रधान सुभानी को हर बिरादरी हर समाज का वोट मिला है।

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Updated on:
26 Feb 2018 11:28 am
Published on:
26 Feb 2018 11:26 am
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