थेलर के अनुसार आर्थिक एवं वित्तीय फैसले हमेशा तार्किक नहीं होते बल्कि ज्यादातर वे मानवीय हदों से बंधे होते हैं
- राहुल लाल, टिप्पणीकार, अंतरराष्ट्रीय मामलों पर सतत लेखन
थेलर का शोध पड़ताल करता है कि वित्तीय मुद्दों पर किए गए फैसलों पर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारकों का क्या असर रहता है। इस शोध ने निर्णय में आर्थिक और मनोवैज्ञानिक विश्लेषण के बीच सेतु का काम किया है।
अर्थशास्त्र को मनोविज्ञान से जोडक़र उसे मानवीय चेहरा प्रदान करने वाले अमरीकी अर्थशास्त्री रिचर्ड थेलर को वर्ष 2017 के अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है। थेलर के अनुसार आर्थिक एवं वित्तीय फैसले हमेशा तार्किक नहीं होते बल्कि ज्यादातर वे मानवीय हदों से बंधे होते हैं। रिचर्ड थेलर ने अर्थशास्त्र में ‘बिहेविरियल इकोनॉमिक्स’ यानी व्यवहार अर्थशास्त्र को परंपरागत नजरिए से हटकर पेश किया है। आमतौर पर यह माना जाता है कि उपभोक्ता वित्तीय मामलों में हमेशा समझदारी से फैसले लेता है। थेलर ने इसी मान्यता को खारिज किया। वर्ष 2008 में ‘नज’ नामक किताब लिखने वाले थेलर का मानना है कि लोग विवेक को ताक पर रखकर भी कई आर्थिक फैसले लेते हैं।
उन्होंने अपनी रिसर्च में बताया कि लोग एक समान तरीके से तार्किक स्थिति से दूर हो जाते हैं, ऐसे में उनके व्यवहार के बारे में पता लगाया जा सकता है। उन्होंने एक उदाहरण द्वारा इसे स्पष्ट करने की कोशिश की। पेट्रोल की कीमतें कम होने की स्थिति में अर्थशास्त्र के मान्य सिद्धांतों के तहत उपभोक्ता बचे हुए पैसे से बहुत जरूरी सामान ही खरीदेगा। हकीकत यह है कि वह इस हालत में भी बचे हुए धन को पेट्रोल पर ही खर्च करेगा। उन्होंने सिद्ध किया कि लोग आमतौर पर उस वस्तु के लिए ज्यादा खर्च करते हैं जो उनके पास पहले से मौजूद है। उन्होंने इसे ‘एंडोवमेंट इफेक्ट’ की संज्ञा दी।
दरअसल थेलर ने अर्थशास्त्र और मनोविज्ञान के बीच की खाई पाटने की कोशिश की है। थेलर का शोध यह पड़ताल करता है कि वित्तीय मुद्दों पर किसी व्यक्ति, व्यक्तियों या समूहों द्वारा किए गए फैसलों पर मनोवैज्ञानिक और समाजिक कारकों का क्या असर रहता है। थेलर के शोध ने निर्णय की प्रक्रिया में आर्थिक और मनोवैज्ञानिक विश्लेषण के बीच सेतु का काम किया है। इसमें सीमित तर्कसंगतता, सामाजिक प्राथमिकताएं और स्व नियंत्रण की कमी के परिणामों की पड़ताल करते हुए उन्होंने दिखाया है कि ये मानवीय गुण व्यक्तिगत फैसलों और बाजार के परिणामों को किस प्रकार प्रभावित करते हैं।
उनका अनुभव आधारित शोध परिणाम और सैद्धांतिक परख नए और तेजी से फैलते व्यवहारिक अर्थशास्त्र के क्षेत्र के लिए मददगार साबित हुए हैं। उनके दिए सूत्रों से लोग खुद पर बेहतर तरीके से नियंत्रण रख सकते हैं। कई लोगों को देखा होगा कि वे अत्यधिक अतार्किक निर्णय से खर्च करते हैं, फलत: उनका बजट बिगड़ जाता है। आर्थिक मनोविज्ञान फिजूलखर्ची की वजह बताकर फिजूलखर्ची रोकने में अत्यंत सहायक है।