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Podcast : श्रद्धा है माया का प्रतिबिम्ब

श्रद्धा एक शब्द है जिसका अर्थ है एक ही सूत्रभाव। हम श्रद्धा को भक्ति का आधार मानते हैं। मन का श्रेष्ठतम-मधुरतम भाव है श्रद्धा। श्रद्धा तत्त्व भी है जिससे जगत् का निर्माता सोम राजा उत्पन्न होता है। श्रद्धा सृष्टि का मूल है- सौम्य तत्त्व है। चन्द्रमा के तीन मनोता—श्रद्धा-रेत-यश में श्रद्धा प्रमुख है। यही पितरों के लिए प्रतिष्ठित श्राद्ध परम्परा का आधार है। पितर भी तो सृष्टि के कारक तत्त्व हैं। ब्रह्माण्ड शृंखला में सुनें पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी का यह विशेष लेख- श्रद्धा है माया का प्रतिबिम्ब
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Jul 24, 2026
sharir hi brahmand
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Gulab Kothari Article शरीर ही ब्रह्माण्ड: वेद वाक्य है कि आत्मा के जिस अंश का दूसरे के आत्मा में समर्पण किया जाता है, वह वहां दूसरे के आत्मा का सहारा लेकर रहता है। वहीं रहकर प्रतिष्ठा प्राप्त करता है। आत्मा का वह अंश श्रित कहलाता है। जिस सूत्र से वह दूसरे के आत्मा से बंधा रहता है, उसे श्रत-सूत्र कहते हैं। इसी सूत्र को श्रद्धा कहते हैं।

पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की बहुचर्चित आलेखमाला है - शरीर ही ब्रह्माण्ड। इसमें विभिन्न बिंदुओं/विषयों की आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से व्याख्या प्रस्तुत की जाती है। गुलाब कोठारी को वैदिक अध्ययन में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। उन्हें 2002 में नीदरलैन्ड के इन्टर्कल्चर विश्वविद्यालय ने फिलोसोफी में डी.लिट की उपाधि से सम्मानित किया था। उन्हें 2011 में उनकी पुस्तक मैं ही राधा, मैं ही कृष्ण के लिए मूर्ति देवी पुरस्कार और वर्ष 2009 में राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान से सम्मानित किया गया था। 'शरीर ही ब्रह्माण्ड' शृंखला में प्रकाशित विशेष लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें नीचे दिए लिंक्स पर-

Updated on:
24 Jul 2026 06:41 pm
Published on:
24 Jul 2026 06:41 pm