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प्रसंगवश: ‘आयुष्मान’ बना ‘धंधा’, सख्त कार्रवाई जरूरी

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के निर्देश पर छत्तीसगढ़ के निजी अस्पतालों की हुई जांच। गहन निगरानी से ही योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंच सकता है...
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Chhattisgarh

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को पांच लाख रुपए तक की मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान योजना को कमाई का जरिया बना लिया गया है। कमाई के इस गोरखधंधे में आयुष्मान योजना के लिए अनुबंधित कुछ निजी अस्पताल संलिप्त हैं, जिनमें कुछ तथाकथित नामी-गिरामी निजी अस्पताल भी शामिल हैं।

पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के करीबन 19-20 निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य विभाग की जांच टीमों ने छापामार तरीके से निरीक्षण किया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के निर्देश पर की गई इस जांच के दायरे में रायपुर के 7, बिलासपुर के 3, दुर्ग के 2 तथा सरगुजा, बस्तर, कबीरधाम, कोंडागांव और कोरबा के 1-1 निजी अस्पताल शामिल थे। यह जांच अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं, स्टाफ और गुणवत्ता मानकों को परखने के उद्देश्य से की गई है। जांच में आयुष्मान रेकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान किया गया, जिसमें कई बिंदुओं पर गड़बड़ी पाई गई। जांच की कार्रवाई के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो इसके आधार पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।

एनएचए आयुष्मान योजना में ऐसी गड़बड़ियों की आशंका वाले अनुबंधित अस्पतालों को 'वेरी हाई रिस्क' श्रेणी में रखता है। इस श्रेणी में रखे जाने का मतलब है कि फर्जी बिलिंग, मरीजों से अतिरिक्त वसूली या इलाज में अनियमितता की शिकायतें हों। इस सूची में शामिल अस्पतालों के दावों और उपचार रेकॉर्ड की विशेष रूप से गहन जांच की जाती है। जांच में अनियमितता पाए जाने पर अस्पतालों का अनुबंधन रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई की जाती है। रायपुर के दो निजी अस्पतालों पर यह कार्रवाई की गई है, उन्हें आयुष्मान योजना के अनुबंध से बाहर कर दिया गया है।

सरकार को चाहिए कि ऐसी जनहितकारी योजना संचालित अस्पतालों में नियमित जांच करे, ताकि उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा मिल सके। ऐसी जांचें अस्पतालों को नियमों का पालन करने और अपनी कमियों को सुधारने के लिए प्रेरित करती हैं।-अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com