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बांग्लादेश : न्यायपालिका पर अंकुश!

बड़ा सवाल है कि जब न्यायपालिका ही स्वतंत्र नहीं होगी तो लोकतंत्र कैसे मजबूत होगा?

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Nov 18, 2017
bangladesh media

- दीपक के. सिंह, द.एशिया मामलों के जानकार

बांग्लादेश के २१वें मुख्य न्यायाधीश सुरेन्द्र कुमार सिन्हा के इस्तीफे के बाद वहां न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। दरअसल जस्टिस सिन्हा और बांग्लादेश सरकार के बीच एक फैसले के बाद तकरार चल रही थी। जुलाई में सिन्हा की अध्यक्षता वाली ७ सदस्यों की बैंच ने जजों पर संसद में महाभियोग चलाने सम्बंधित १६वें संविधान संशोधन को खारिज कर दिया। इस संशोधन के जरिए सरकार जजों को भी जांच के दायरे में लाना चाहती थी। इसके बाद ही उनकी सत्तारूढ़ अवामी लीग की सरकार के साथ तकरार शुरू हुई। धीरे-धीरे यह फैसला राजनीतिक मुद्दा बन गया। मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए सही ठहराया।

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बांग्लादेश में सवाल उठ रहे हैं कि न्यायपालिका ही स्वतंत्र नहीं रहेगी तो लोकतंत्र मजबूत कैसे हो पाएगा? ऐसी स्थिति में राजनीतिक स्वेच्छाचारिता को बढ़ावा मिलेगा। जस्टिस सिन्हा ने यह भी कहा कि सरकार निचली अदालतों पर पहले ही नियंत्रण कर चुकी है अब शीर्ष कोर्ट को भी अपने नियंत्रण में लाना चाहती है। जस्टिस सिन्हा ने इस्तीफे में क्या लिखा है उसे अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया। सरकार जिस तरह से न्यायपालिका पर दबाव बना रही है उससे लगता है कि न्यायपालिका ज्यादा दिनों तक स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर पाएगी। फैसले के बाद राष्ट्रपति अब्दुल हामिद ने २२ जजों को समन देकर बुलाया। मीटिंग के बाद पांच वरिष्ठ जजों ने सिन्हा पर लगाए गए मनी लॉन्ड्रिंग, भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता के ११ आरोपों पर सफाई मांगी जिससे सिन्हा ने मना कर दिया।

सिन्हा के मना करने के बाद इन जजों ने उनके साथ कार्य करने से इनकार कर दिया। ऐसी स्थिति में सिन्हा के सामने विकल्पहीनता की स्थिति पैदा हो गई और उन्हें आभास हो गया कि वे ज्यादा दिनों तक पदासीन नहीं रह पाएंगे। वे एक महीने की छुट्टी लेकर ऑस्ट्रेलिया गए और वहां से सिंगापुर जाकर बांग्लादेश के दूतावास में इस्तीफा सौंप आए। सिन्हा के छुट्टी पर जाने के बाद मियां अब्दुल वहाब कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं और वरिष्ठता के आधार पर वे सिन्हा का स्थान लेंगे।

वहाब पर सिन्हा का फैसला पलटने का दबाव है, यदि वे ऐसा करते हैं तो न्यायपालिका की साख खत्म हो जाएगी। सिन्हा फिलहाल अपनी बेटी के पास कनाडा में हैं। उन्होंने छुट्टी पर जाते समय कहा था कि वे वापस अपने देश लौटेंगे पर इसके आसार कम ही नजर आते हैं क्योंकि कहीं कहीं उन्हें लग रहा कि यदि वे बांग्लादेश वापस आए तो गिरफ्तार करके उन पर मुकदमें चलाए जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में उनके भारत में शरण लेने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

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Published on:
18 Nov 2017 01:02 pm
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