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Podcast : आत्मप्रकाश ही भगवत्ता

आत्मबल स्वतंत्र और वित्तबल आश्रित धर्म है। आत्मबल ऐश्वर्य है तो वित्त बल श्री है। ईश्वर सभी जड़-चेतन भूतों में विद्यमान है - यही ज्ञान अणिमा है। इसी अणिमाभाव में आए हुए ईश्वर का महाविश्व रूप में परिणत होना ही भूमाभाव है। ब्रह्माण्ड शृंखला में सुनें पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी का यह विशेष लेख- आत्मप्रकाश ही भगवत्ता
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Jul 31, 2026
Podcast

Gulab Kothari Article शरीर ही ब्रह्माण्ड: वेद वाक्य है कि आत्मा के जिस अंश का दूसरे के आत्मा में समर्पण किया जाता है, वह वहां दूसरे के आत्मा का सहारा लेकर रहता है। वहीं रहकर प्रतिष्ठा प्राप्त करता है। आत्मा का वह अंश श्रित कहलाता है। जिस सूत्र से वह दूसरे के आत्मा से बंधा रहता है, उसे श्रत-सूत्र कहते हैं। इसी सूत्र को श्रद्धा कहते हैं।

पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की बहुचर्चित आलेखमाला है - शरीर ही ब्रह्माण्ड। इसमें विभिन्न बिंदुओं/विषयों की आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से व्याख्या प्रस्तुत की जाती है। गुलाब कोठारी को वैदिक अध्ययन में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। उन्हें 2002 में नीदरलैन्ड के इन्टर्कल्चर विश्वविद्यालय ने फिलोसोफी में डी.लिट की उपाधि से सम्मानित किया था। उन्हें 2011 में उनकी पुस्तक मैं ही राधा, मैं ही कृष्ण के लिए मूर्ति देवी पुरस्कार और वर्ष 2009 में राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान से सम्मानित किया गया था। 'शरीर ही ब्रह्माण्ड' शृंखला में प्रकाशित विशेष लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें नीचे दिए लिंक्स पर-

Updated on:
31 Jul 2026 07:58 pm
Published on:
31 Jul 2026 07:58 pm