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इंसानों की सुरक्षा सर्वोपरि, शेल्टर होम ही विकल्प

विजय गोयल, पूर्व केेंद्रीय मंत्री

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Aug 19, 2025
पूर्व केेंद्रीय मंत्री विजय गोयल

Stray Dogs Case Update: आवारा कुत्तों को लेकर देशभर में छिड़ी बहस के बीच पूर्व केेंद्रीय मंत्री विजय गोयल का बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर दो खेमे बन गए हैं- एक, जो कुत्तों को शेल्टर होम भेजने के खिलाफ हैं और दूसरे वे जो उन्हें सड़कों से हटाना चाहते हैं। लेकिन सच्चाई इससे अलग है। हकीकत यह है कि केवल 10 फीसदी से भी कम तथाकथित डॉग लवर्स इस बहस को चला रहे हैं, जबकि देश की 90 फीसदी जनता इन कुत्तों से त्रस्त है। दिल्ली का उदाहरण देख लीजिए। सैकड़ों की संख्या में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) हैं। ये सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा है कि इंसानों की सुरक्षा सर्वोपरि है और आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाकर शेल्टर होम में रखना सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन दुर्भाग्य से कुछ तथाकथित पशु-प्रेमी और एनजीओ इसे भावनात्मक मुद्दा बनाकर आम जनता की पीड़ा को अनसुना कर रहे हैं।

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दिल्ली में दस लाख से अधिक आवारा कुत्ते…

हमारी संस्कृति में पशु-पक्षियों की रक्षा के लिए हर पशु-पक्षी को किसी न किसी देवता के साथ बिठाया गया है, ताकि लोग उनका भी सम्मान करें। हमारा आंदोलन भी कुत्तों को सम्मान दिलाने के लिए है क्योंकि यदि ये इसी तरह से काटते रहे तो लोग इनसे नफरत करने लगेंगे। हमारे बचपन में घर-घर यह परंपरा थी कि पहली रोटी गाय को और आखिरी रोटी कुत्ते को दी जाती थी। उस समय गली-मोहल्ले में मुश्किल से एक-दो कुत्ते होते थे, जो सबके परिचित थे और किसी के लिए खतरा नहीं थे। लेकिन आज गली-कूचों में झुंड के झुंड कुत्ते घूमते हैं और आए दिन उनके द्वारा किए हमले की खबरें आती हैं। दिल्ली में ही आज करीब दस लाख आवारा कुत्ते हैं। अगर आज से भी नसबंदी और वैक्सीनेशन पूरी रफ्तार से शुरू हो जाए तो भी इन दस लाख कुत्तों का क्या होगा, जो सड़कों पर हैं। ये इसी तरह से क्या काटते रहेंगे और आम जनता भय के साये में जीती रहेगी?

मौत का बढ़ता ग्राफ; रेबीज से जीने की उम्मीद कम

हर साल लाखों लोग कुत्तों के हमलों का शिकार होते हैं। हमारे देश में रेबीज जैसी बीमारी से मौतें होती हैं। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह सबसे बड़ा खतरा है। हमारे देश में रेबीज जैसी भयावह बीमारी से हर साल लोग मारे जाते हैं। जिसे रेबीज हो जाए उसकी जीने की बहुत कम उम्मीद रहती है।

ज्यादातर शेल्टर होम के विरोधी वे लोग हैं जिन्होंने घर में देसी-विदेशी कुत्ता पाल रखा है, पर वे इन आवारा कुत्तों को गोद नहीं लेंगे। ये कहते हैं कि सरकार के पास न इतना फंड है और न इतने शेल्टर हैं फिर इन आवारा कुत्तों को कहां रखेंगे? लेकिन यदि ऐसा करके इनको बता दिया जाए ये तब भी नहीं मानेंगे। ये कहते हैं शेल्टर होम मत भेजो। स्टरलाइजेशन और वैक्सीनेशन से कंट्रोल करो। यदि इनकी बात मान भी लेते हैं तो फिर जो दस लाख कुत्ते सड़क पर अभी हैं और काटते रहते हैं उनका क्या इलाज है?

कुत्ता प्रेमियों की असली चिंता- ‘विदेशी फंड’

ज्यादातर कुत्ता प्रेमियों ने अपने एनजीओ बना रखे हैं जिनमें ये विदेशी फंड लेते हैं, इनकी असली चिंता ये है। दिल्ली में एमसीडी ने इन जैसी 20 एनिमल वेलफेयर एसोसिएशन को स्टरलाइजेशन-वैक्सीनेशन का काम दे रखा था। इन्होंने ही यह काम ठीक से नहीं किया। इन एसोसिएशन ने ना तो कोई शेल्टर होम बनाएं, न ही वे इन कुत्तों को गोद लेने के लिए तैयार हैं और न ही जिनको ये कुत्ते काटते हैं उनकी कोई मदद करते हैं।

आज तक कुत्तों की भलाई के लिए भी इन्होंने ना कोई आवाज उठाई और ना ही इनके लिए काम किया। अब जब सरकार सुप्रीम कोर्ट का आदेश पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है, तब इन कुत्ता प्रेमियों को भी चाहिए कि वे सरकार की मदद करें क्योंकि हमारा लक्ष्य है मानव और पशु एक साथ विश्वास के साथ रह सकें।

यह लड़ाई ‘कुत्ता-प्रेम’ बनाम ‘कुत्ता-विरोध’ की नहीं है। यह लड़ाई मानव जीवन और सुरक्षा की है। इंसान और कुत्तों- दोनों की भलाई इसी में है कि इंसानों के लिए सड़कें सुरक्षित हों और कुत्तों को सही ढंग से शेल्टरों में रखा जाए। बड़े पैमाने पर कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाए जाएं। वहां इनकी उचित देखभाल की जाए। डॉग लवर्स वहां जाकर खाना खिलाएं। नसबंदी और वैक्सीनेशन अभियान युद्ध-स्तर पर चलाया जाए। भीड़भाड़ और पर्यटन वाले क्षेत्रों से कुत्तों को तुरंत हटाया जाए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सख्ती से पालन हो।

बता दें पूर्व केेंद्रीय मंत्री विजय गोयल पिछले दो वर्षों से कुत्तों की समस्या पर आंदोलन चला रहे हैं।
उनके मुताबिक देशभर में 1.5 करोड़ आवारा कुत्ते हैं। देशभर में 37 लाख से ज्यादा डॉग बाइट के केस सिर्फ 2024 में सामने आए, इसमें से 54 लोगों की मौत रेबीज से मौत हो चुकी है।

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