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सालभर में 56 मेडल, नेशनल से लेकर इंटरनेशनल लेवल तक एथलीट्स बजा रहें डंका, ओलंपिक में मेडल है सपना

एकेडमी से अब तक 27 खिलाड़ियों ने मिलकर कुल 56 मेडल जीते हैं, जिसमें से सबसे ज्यादा मेडल रेसलिंग में आए हैं।

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May 16, 2025

कहते हैं अगर किसी को कुछ करना होता है कि उनके लिए हर चुनौती आसान हो जाती है। चुरू में बने उर्मिला स्पोर्ट्स एकेडमी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। ये एकेडमी देश के ओलंपिक में मेडल की संख्या को बढ़ाने के इरादे से युवा एथलीट्स को बिल्कुल फ्री में ट्रेनिंग दे रहा है। न सिर्फ ट्रेनिंग बल्कि हॉस्टल में रहने की फ्री व्यवस्था के साथ उनकी डाइट और जिम की व्यवस्था भी बिल्कुल फ्री में उपलब्ध कराई जा रही है।

साल 2024-25 के दौरान इस एकेडमी के खिलाड़ियों ने कुश्ती में 32, वेटलिफ्टिंग में 16 और बॉक्सिंग में 8 पदक जीते हैं। राज्य स्तर या उससे ऊपर की प्रतियोगिताओं में कुल 27 खिलाड़ियों ने अब 56 पदक हासिल किए हैं। यहां न सिर्फ राजस्थान के बल्कि देश के कोने कोने से युवा एथलीट आते हैं, जिनका लक्ष्य ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतना है।

साल 2023-24 में यहां के एथलीट्स ने 48 पदक जीते। अल्बानिया में आयोजित अंडर-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप 2024 में मोनिका ने कांस्य पदक जीतकर साथी एथलीट्स का हौसला बढ़ाया। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न श्रेणियों में स्वर्ण, रजत और कांस्य भी जीता है। नेशनल लेवल पर अन्नू कुमारी ने भारोत्तोलन में 1 स्वर्ण पदक जीता और सनी ने कुश्ती की कई श्रेणियों में 2 स्वर्ण पदक जीते हैं।

फ्री में दी जाती है कोचिंग

उर्मिला स्पोर्ट्स एकेडमी में इस समय 40 एथलीट्स हैं, जिन्हें फ्री में सारी सुविधाएं दी जा रही हैं। यहां बॉक्सिंग के लिए विश्वस्तरीय बॉक्सिंग रिंग है तो बच्चों को ट्रेन करने के लिए कोच भी रखे गए हैं, जो इस स्पर्धा के हिसाब से ही एथलीट्स को ट्रेनिंग के बाद जिम करवाते हैं। वेटलिफ्टिंग और रेसलिंग के लिए भी यहां बेहतरीन मैट लगाए गए हैं। कहने का मतलब है कि अगर आपके अंदर कुछ कर गुजरने का जज्बा है तो वर्ल्डक्लास सुविधाओं से लैस ये एकेडमी आपके सपनों को उड़ान भरने में पूरी मदद के लिए तैयार है।

भविष्य के सितारों का टारगेट

एकेडमी 11 साल के एथलीट धीरज ने बताया कि उनका सपना भारत के लिए ओलंपिक में मेडल जीतना है। यहां कई ऐसे शहरों से भी युवा आए हैं, जिसे स्पोर्ट्स का हब माना जाता है, जैसे मेरठ, सोनीपत, रोहतक और भिवानी। सबका लक्ष्य सिर्फ भारत के लिए मेडल जीतना है। एकेडमी के हेड कोच मोहन लाल उपाध्याय उनकी हर तरह से मदद के लिए तैयार हैं और गलतियों पर उन्हें उचित सजा भी देते हैं, जिससे एथलीट्स अनुशासन में रहें। चुरु जैसे सूखे शहर में बना ये एकेडमी आने वाले समय में मेडल की बारिश कर सकता है।

Updated on:
16 May 2025 09:55 pm
Published on:
16 May 2025 09:46 pm
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