अन्य खेल

शैलेजा जैन: वह भारतीय महिला जिसकी वजह से एशियन गेम्स में भारतीय कबड्डी टीम का हुआ बेड़ागर्क

इस भारतीय महिला के कारण ईरान की टीम एशियाई गेम्स 2018 में भारत को हराते हुए स्वर्ण पदक जीतने में कामयाबी हासिल की।

2 min read
kabaddi
शैलेजा जैन: वह भारतीय महिला जिसकी वजह से एशियन गेम्स में भारतीय कबड्डी टीम का हुआ बेड़ागर्क

नई दिल्ली। इंडोनेशिया में जारी 18वें एशियन गेम्स में शुक्रवार को भारतीय महिला कबड्डी टीम को फाइनल में हार का सामना करते हुए रजत पदक से संतोष करना पड़ा। जकार्ता में खेले गए इस फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम को ईरान ने 27-24 के अंतर से मात दी। इस जीत के साथ ही ईरान की टीम पहली बार एशियन चैंपियन बनने का रूतबा हासिल किया। बताते चले कि महिला वर्ग के मुकाबले से एक दिन पहले ईरान की पुरुष टीम ने भारतीय पुरुष कबड्डी टीम को सेमाफाइनल में हरा दिया था। इन दो हारों की वजह भारत को उन दो स्वर्ण पदकों का नुकसान झेलना पड़ा, जिनका जीतना लगभग तय माना जा रहा था।

हालांकि किसी भी खेल की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि यहां सालों से चैंपियन बनने वाली टीम को भी शिकस्त झेलनी पड़ती है। वहीं भारतीय टीम के साथ भी हुआ। पुरुष वर्ग में पिछले 28 सालों से चली आ रही बादशाहत जबकि महिला वर्ग में पिछले 12 साल से चले आ रहे जीत का सिलसिला अब थम चुका है। उल्लेखनीय है कि एशियन गेम्स में भारत की पुरुष कबड्डी टीम 2018 से पहले ही सभी सात आयोजनों का चैंपियन रहा था। जबकि महिला वर्ग में पिछले दोनों आयोजनों में भारतीय बेटियों ने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया था।

कबड्डी में भारतीय टीम की हार न केवल खिलाड़ियों के लिए बल्कि खेल प्रेमियों के लिए भी बड़ा झटका है। मैच के दौरान भी आपने देखा होगा कि अंतिम समय में भारतीय कप्तान अजय ठाकुर की आंखे नम थी। पुरुष टीम की हार के बाद भारतीय बेटियों से ये उम्मीद थी कि वो ईरान को हरा कर बदला चुकता करेंगे। लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका। कारण कि ईरान की टीम की हर एक रणनीति के पीछे एक भारतीय महिला का बहुत बड़ा योगदान था। उन्हीं के दिशा-निर्देश पर चलते हुए ईरान ने यह जीत हासिल की।

ईरान की टीम को मदद करने वाली यह भारतीय महिला शैलेजा जैन हैं। यहां एक बात साफ कर दूं कि जैन ने जो कुछ भी किया, वो उनका पेशा है। दरअसल शैलेजा ईरान की महिला कबड्डी टीम की कोच है। जैन पिछले डेढ़ साल से ईरान की महिला टीम को प्रशिक्षण दे रही है। ईरान को ट्रेनिंग देने के लिए शैलेजा ने फारसी भाषा सीखी। सख्त इस्लामिक नियमों के कारण उन्हें अपने काम में कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन शैलेजा ने हिम्मत नहीं छोड़ी। आज उनकी मेहनत रंग ला चुकी है।

Published on:
25 Aug 2018 12:48 pm
Also Read
View All
Doha Diamond League 2026: चोट के बाद पहली बार एक्शन में दिखेंगे नीरज चोपड़ा, जानें कब, कहां और कैसे देख सकते हैं दोहा डायमंड लीग

Cristiano Ronaldo: पुर्तगाल से ड्रॉ के बाद रोनाल्डो को चिढ़ाने लगे फैंस, स्टेडियम में गूंजे ‘मेसी-मेसी’ के नारे

Messi vs Mbappe: 4 घंटे में बदला वर्ल्ड कप का खेल, पहले एमबापे आगे निकले, फिर मेसी ने हैट्रिक से पलट दी बाजी, पिछले साल की जंग हुई शुरू

Lionel Messi Hat-trick: गोल के बाद रो पड़े लियोनल मेसी, फिर बताई वजह, हैट्रिक से क्लोजे के रिकॉर्ड की बराबरी की

FIFA World Cup records: क्रिस्टियानो रोनाल्डो या लियोनल मेसी नहीं, वर्ल्डकप में मिरोस्लाव क्लोजे ने दागे हैं सबसे ज्यादा गोल