इस्लामिक सहयोग संगठन की बैठक में बोले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ओआईसी को इस्लाम धर्म को लेकर अपने विचार स्पष्ट करने चाहिए ओआईसी 1969 में स्थापित एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है
लाहौर। आतंकवाद को लेकर दुनिया भर में जिल्लत झेल रहा पाकिस्तान अब अपने आपको निर्दोष साबित करने में लगा है। इस्लाम के नाम पर पूरी दुनिया में दहशतगर्दी फैलाने वालों की आलोचना करने की बजाय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान एक बैठक में इसका बचाव करते दिखे। इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की बैठक में इमरान ने कहा कि इस्लाम का आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यहां पर सवाल उठाए कि इस्लाम को आतंकवाद से क्यों जोड़ा जाता है। जबकि हिंदू धर्म को इससे दूर रखा जाता है। तमिल टाइगर्स एलटीटीई के बम विस्फोट या जापानी धर्म को कभी दोषी नहीं ठहराया गया, जबकि इनके लोगों ने अमरीकी जहाजों में खुद को उड़ा लिया था।
इस्लाम दिन पर दिन बदनाम होता जा रहा
उन्होंने जोर देकर कहा कि इस्लाम दिन पर दिन बदनाम होता जा रहा है। इसका कारण है कि मुस्लिम मुल्कों ने कभी भी इसके खिलाफ अवाज नहीं उठाई। वह दुनिया को यह समझाने में सक्षम नहीं दिखे कि इस्लाम का आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं है। ओआईसी को इस्लाम धर्म को लेकर अपने विचार स्पष्ट करने चाहिए। गौरतलब है कि ओआईसी 1969 में स्थापित एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है। इसका मुख्य उद्देश्य इस्लामी सामाजिक और आर्थिक मूल्यों को संरक्षित करना और अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखना है। लेकिन कुछ आलोचकों का कहना है कि संकट में मुस्लिम देश एक दूसरे जुड़ाव में कमी महसूस कर रहे हैं, जबकि इसने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से प्रगति की है।
पाकिस्तान के आर्थिक हालात बेहद खराब
इमरान खान के इस बोल से अंदाजा लगाया जा सकता है कि आतंकवाद को लेकर वैश्विक दबाव को पाकिस्तान किस तरह से झेल रहा है। अमरीका द्वारा प्रतिबंध लगने के बाद पाकिस्तान के आर्थिक हालात बेहद खराब है। उसके यहां रोजमर्रा का सामना भी महंगा हो चुका है। इमरान खान खुद सार्वजनिक मंच से देश की आर्थिक स्थिति के बारे में बोल चुके हैं। उन्होंने हाल में देशवासियों से अपील की थी कि वह ऐसे हालात में संयम बरतें। पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी मुसीबत है कि उस पर आतंकवाद के वित्त पोषण का आरोप लग रहा है। इन आतंकियों को पाक सेना ही तैयार करती है। अब इमरान चाहते है कि पाकिस्तान की इस छवि को तोड़ा जाए।
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