पाली

किसानों ने खेती करने का बदला तरीका, जानिए कैसे

- किसानों का बढ़ता जा रहा रूझान- मारवाड़-गोडवाड़ में इस बार तीन गुना होगी जैविक खेती
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Oct 03, 2018
How Farmers Learn to Replace Farming
किसानों ने खेती करने का बदला तरीका, जानिए कैसे

पाली । मारवाड़ गोडवाड़ के किसानों का जैविक खेती में रूझान बढ़ता जा रहा है। पहले जहां करीब एक हजार हैक्टेयर में ही जैविक खेती हो रही थी, वहां इस साल तीन हजार हैक्टेयर में किसान जैविक खेती करेंगे। इधर, इसे बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से किसानों को अनुदान भी दिया जा रहा है। तीन साल तक जैविक खेती करने पर किसानों को एक लोगो भी दिया जाएगा। खास बात ये है कि जैविक खेती करने से किसानों की जमीन तो सुधर ही रही है। साथ ही फसल के दाम भी अधिक मिल रहे हैं। दरअसल, जैविक खेती को बढ़ावा देने का मुख्य उद्ेश्य रसायन खाद के उत्पाद से मानव जीवन पर पडऩे वाले दुष्प्रभाव को कम करना है। रसायन खाद से तैयार होने वाले अनाज से बीमारियों तो बढ़ ही रही है। जमीन भी बंजर हो रही है। ये ही कारण है कि किसानों में जैविक खेती के प्रति रूझान बढ़ता जा रहा है।

तीन साल बाद हरे रंग को मिलेगा लोगो
एक साल तक खेती करने के बाद आसमानी कलर व दूसरे साल लाल कलर का लोगो किसानों को दिया जाता है। तीसरे साल भी जैविक खेती करने पर किसानों को हरे रंग का लोगो दिया जाएगा। जैविक उत्पाद का लोगो नेशनल ऑर्गेनिक फार्मिंग की ओर से दिया जाता है। एक कलस्टर में 25 से 50 किसान हो सकते हैं।

इस बार 150 कलस्टर होंगे
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जिले भर में 150 कलस्टर में जैविक खेती होगी। एक कलस्टर में 20 हैक्टेयर भूमि होगी। एक कलस्टर पर सरकार की ओर से 30 से 40 हजार रुपए का अनुदान दिया जाता है। किसानों को जैविक खाद, बीज ऑर्गेनिक दवाइयां, स्प्रे, उत्पाद पैकिंग करने, जमीन तैयार करने, ऑर्गेनिक खेती का निरीक्षण व बाजार तक बेचने के लिए ट्रांसपोर्ट का खर्चा तक दिया जाएगा।

इस बार बढ़ेगी जैविक खेती
इस साल से जिलेभर में तीन हजार हैक्टेयर भूमि में जैविक खेती होगी। 150 कलस्टर में जैविक खेती होगी। एक कलस्टर पर करीब 30 से 40 हजार रुपए का अनुदान दिया जाता है। इसमें किसान भी रुचि दिखाने लगे हैं। -जितेन्द्रसिंह शक्तावत, उपनिदेशक, कृषि विभाग विस्तार पाली

Updated on:
03 Oct 2018 11:34 am
Published on:
03 Oct 2018 11:32 am