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Pali News: पश्चिमी राजस्थान की जोजरी-बांडी-लूनी नदी में ‘जहर’, सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोला- हालात बेहद गंभीर

Jojri-Bandi-Luni River Pollution: पश्चिमी राजस्थान की जोजरी, बांडी और लूनी नदियों में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पेश हाई-लेवल कमेटी की प्रारंभिक रिपोर्ट ने गंभीर हालात उजागर किए हैं।
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Mar 13, 2026
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बांडी नदी में फैल रहा प्रदूषण। फाइल फोटो- पत्रिका

पाली। पश्चिमी राजस्थान की जोजरी, बांडी और लूनी नदी में बढ़ रहा प्रदूषण अब केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि मानवीय त्रासदी बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई हाई-लेवल कमेटी की प्रारंभिक रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि औद्योगिक इकाइयों से निकले प्रदूषित पानी और सीवरेज के जहरीले मिश्रण ने न केवल बरसाती नदियों को नाला बना दिया है, बल्कि आमजन, पशुधन और पारिस्थितिकी को गंभीर खतरे में डाल दिया है।

रिपोर्ट के तथ्यों पर संज्ञान लेते हुए न्यायाधीश विक्रम नाथ व न्यायाधीश संदीप मेहता की खंडपीठ ने स्थिति को अत्यंत गंभीर माना है। कोर्ट ने अगली सुनवाई 17 मार्च 2026 तय करते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह कमेटी को सभी आवश्यक संसाधन और सहयोग तुरंत उपलब्ध करवाए।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल नवंबर में इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश संगीत लोढ़ा की अध्यक्षता में कमेटी गठित की थी, जिसने अपनी पहली स्थिति रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में नदियों को बचाने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तथा कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की स्थिति में सुधार की सिफारिश की गई है।

प्रदूषण की भयावह तस्वीर

  • रिपोर्ट के अनुसार सूखे और विषम परिस्थितियों को झेलने में सक्षम बबूल के पेड़ बड़ी संख्या में सूख रहे हैं। यह पानी और मिट्टी में घुले धीमे जहर का सबसे बड़ा जैविक प्रमाण है।
  • पाली का नेहड़ा बांध औद्योगिक कचरे और कीचड़ से पूरी तरह पट चुका है। रिपोर्ट में बताया गया है कि बांध में 5 से 6 फीट तक जहरीली गाद जमा है और इसका पानी सिंचाई तो दूर, पशुओं के लिए भी जानलेवा है।
  • औद्योगिक अपशिष्ट के लगातार बहाव से जोधपुर और पाली के निचले इलाकों में हजारों हैक्टेयर उपजाऊ भूमि बंजर हो चुकी है। खेतों में फसल के बजाय अब केवल सफेद केमिकल की परत और बदबूदार पानी नजर आता है।
  • प्रदूषित पानी और जहरीला चारा खाने से स्थानीय पशुओं में बांझपन, गर्भपात और त्वचा संबंधी गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। इससे डेयरी व्यवसाय पर निर्भर किसानों की कमर टूट गई है।
  • पाली में बांडी नदी के तल में मिट्टी डालकर औद्योगिक डिस्चार्ज प्वाइंट्स को छिपाने की कोशिश की गई। कमेटी ने अपनी जांच में इस कवर-अप को पकड़ा है, जिस पर अधिकारी कोई जवाब नहीं दे पाए।
  • रात के अंधेरे में ही नहीं, बल्कि दिनदहाड़े टैंकरों के जरिए औद्योगिक केमिकल को सीधे नदियों और पुराने खदानों में खाली किया जा रहा है। यहां तक कि दूसरे राज्यों से भी जहरीला कचरा लाकर यहां डंप किए जाने के आरोप हैं।
  • प्रदूषण और जलभराव का स्तर इतना अधिक है कि स्कूलों की इमारतें और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पानी में डूबने के कारण खंडहर और अनुपयोगी हो चुके हैं।
  • सीईटीपी संयंत्रों के बाहर खुले में रखे गए हजारों मीट्रिक टन खतरनाक कीचड़ सूखने पर हवा में उड़ रहा है, जिससे आसपास के निवासियों को सांस की गंभीर बीमारियां होने का खतरा है।

ट्रीटमेंट प्लांट बिना ट्रीट पानी सीधे छोड़ रहे

रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश ट्रीटमेंट प्लांट या तो अपनी क्षमता से कम काम कर रहे हैं या फिर मानकों का उल्लंघन करते हुए बिना ट्रीट किया गया पानी सीधे नदियों में छोड़ रहे हैं।

200 पेज की रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित हाई लेवल कमेटी ने पहली 200 पेज की स्टेटस रिपोर्ट तैयार की। इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए और कई गंभीर सवाल खड़े किए गए।

Updated on:
13 Mar 2026 03:55 pm
Published on:
13 Mar 2026 03:55 pm