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Jawai: राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश, जवाई में अनियंत्रित पर्यटन पर लगाम, निर्माण और माइनिंग पर रोक

Jawai Construction Ban: पाली के जवाई क्षेत्र में तेंदुओं के संरक्षण को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए नए निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी है। कोर्ट के निर्देशों के बाद अब बिना अनुमति किसी भी तरह की गतिविधि पर निगरानी और सख्ती बढ़ेगी।

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Apr 30, 2026
जवाई क्षेत्र। फाइल फोटो- पत्रिका

पाली। जवाई क्षेत्र में तेंदुओं के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पूरे जवाई क्षेत्र में नए निर्माण कार्यों पर रोक लगाते हुए स्पष्ट किया है कि बिना न्यायालय की अनुमति कोई भी निर्माण नहीं किया जाएगा। केवल संबंधित गांवों के आबादी क्षेत्र में आवश्यक स्वीकृति के साथ सीमित निर्माण की छूट रहेगी। साथ ही तेंदुओं के आवागमन और उनके प्राकृतिक आवास को प्रभावित करने वाली सभी व्यावसायिक पर्यटन गतिविधियों पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

न्यायाधीश डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायाधीश संदीप शाह की खंडपीठ ने तेंदुओं के संरक्षण से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए। याचिका में जवाई क्षेत्र में बढ़ती पर्यटन गतिविधियों, अवैध खनन और अनियंत्रित निर्माण से तेंदुओं के प्राकृतिक आवास को खतरा होने की बात सामने रखी गई थी। खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि जवाई क्षेत्र तेंदुओं का अत्यंत महत्वपूर्ण आवास है, जहां वर्षों से मानव और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व बना हुआ है, लेकिन हाल के वर्षों में यह संतुलन प्रभावित हो रहा है।

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पर्यावरण संरक्षण

खंडपीठ ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक मुद्दा नहीं, बल्कि जीवन के अस्तित्व की बुनियादी आवश्यकता है। कोर्ट ने माना कि जवाई क्षेत्र देश के उन चुनिंदा इलाकों में शामिल है, जहां तेंदुओं का घनत्व अधिक है। यहां की ग्रेनाइट पहाड़ियां, गुफाएं, कॉरिडोर और फुटहिल क्षेत्र तेंदुओं की आवाजाही और निवास के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों का संरक्षण जरूरी है।

अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जवाई क्षेत्र के लिए तैयार स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के प्रारूप को महत्वपूर्ण दस्तावेज बताते हुए इसे तुरंत प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए। अंतिम एसओपी तैयार होने तक यह ड्राफ्ट एसओपी प्रभावी रहेगा।

कोर्ट ने राजस्थान सरकार को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धाराओं 8 और 18 के तहत जवाई क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने की संभावना पर विचार करने को कहा है। साथ ही राज्य वन्यजीव बोर्ड को आवश्यक कार्रवाई शीघ्र करने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार से आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने और अगली सुनवाई से पहले अनुपालना रिपोर्ट शपथ पत्र के रूप में पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी।

हाईकोर्ट के प्रमुख निर्देश

  • जवाई क्षेत्र में कोर्ट की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का नया निर्माण नहीं होगा
  • गांवों की आबादी क्षेत्र में आवश्यक स्वीकृति के साथ सीमित निर्माण की अनुमति रहेगी
  • तेंदुओं के आवास, गुफाओं, पहाड़ियों, फुटहिल और कॉरिडोर क्षेत्रों की स्थिति यथावत रखी जाएगी
  • तेंदुओं के आवास या आवागमन को प्रभावित करने वाले पर्यटन प्रतिष्ठानों और निर्माण गतिविधियों पर यथास्थिति रहेगी
  • नए होटल, रिसोर्ट, गेस्ट हाउस या होम-स्टे के लिए नए लाइसेंस जारी नहीं किए जाएंगे
  • जमीन के उपयोग में परिवर्तन होने पर भी कोर क्षेत्र की स्थिति नहीं बदलेगी
  • सभी प्रकार की खनन गतिविधियों पर रोक रहेगी और नई कंटीली तारबंदी या कृत्रिम विभाजन नहीं होगा
  • ड्राफ्ट एसओपी तुरंत लागू रहेगा और अंतिम एसओपी बनने तक प्रभावी रहेगा
  • जवाई सफारी एवं ईको-टूरिज्म समन्वय समिति तुरंत काम शुरू करेगी
  • जवाई बांध और ओवरफ्लो क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही पर रोक रहेगी, नाइट सफारी बंद रहेगी
  • राज्य सरकार जवाई क्षेत्र को अभयारण्य घोषित करने पर विचार करेगी

जवाई क्षेत्र में 50-70 लेपर्ड

याचिका में बताया गया कि जवाई क्षेत्र की विशिष्ट ग्रेनाइट पहाड़ियां और गुफाएं तेंदुओं के लिए अनूठा आवास हैं। यहां तेंदुओं की संख्या 50 से 70 के बीच आंकी गई है, जिससे यह देश के सबसे घने तेंदुआ आवासों में शामिल होता है। अनियंत्रित ईको-टूरिज्म, अवैध खनन और लगातार हो रहे निर्माण कार्य इस पारिस्थितिक संतुलन को प्रभावित कर रहे हैं।

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