Unique Sibling Bond: जब डॉक्टरों ने बताया कि नवलकिशोर की जान बचाने के लिए किडनी ट्रांसप्लांट ही एकमात्र रास्ता है, तब उनकी बहन पद्मा शर्मा उर्फ गुड्डी (पत्नी एडवोकेट सूर्यप्रकाश शर्मा) बिना किसी संकोच के आगे आईं।
Married Sister Donate Kidney To Brother: दुनिया में भाई-बहन का रिश्ता सबसे अनूठा और पवित्र माना जाता है। इस रिश्ते की गहराई और निस्वार्थ समर्पण की एक ऐसी मिसाल पेश की है एक बेटी पद्मा शर्मा उर्फ गुड्डी ने जिन्होंने अपने भाई को मौत के मुंह से बाहर निकालने के लिए अपने शरीर का अंग दान कर दिया। नडियाद (गुजरात) के अस्पताल में जब यह सफल प्रत्यारोपण हुआ, तो न केवल एक जीवन बचा, बल्कि रिश्तों के प्रति विश्वास और गहरा हो गया।
पाली के रामदेव रोड कुम्हारों का बास निवासी सोहनलाल पाईसवाल की बड़ी प़ुत्री की शादी नवंबर में थी। उसके बाद अचानक उनके पुत्र नवलकिशोर की तबीयत खराब हो गई। जांच में उनकी दोनों किडनियां खराब होना पाई। इस पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
नवलकिशोर को इलाज के लिए नडियाद स्थित मूलजी भाई पटेल किडनी हॉस्पिटल में भर्ती कराया, जहां वे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे थे।
जब डॉक्टरों ने बताया कि नवलकिशोर की जान बचाने के लिए किडनी ट्रांसप्लांट ही एकमात्र रास्ता है, तब उनकी बहन पद्मा शर्मा उर्फ गुड्डी (पत्नी एडवोकेट सूर्यप्रकाश शर्मा) बिना किसी संकोच के आगे आईं। एक बहन के लिए भाई की मुस्कान से बढ़कर कुछ नहीं था। उन्होंने अपनी सेहत की परवाह किए बिना भाई को नई जिंदगी देने का कठिन निर्णय लिया। इसके लिए पद्मा के पति राजेन्द्र नगर निवासी एडवोकेट सूर्यप्रकाश शर्मा का भी सहयोग रहा।
16 अप्रेल 2026 को नडियाद के विशेषज्ञों ने यह जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न किया। अस्पताल के गलियारों में मौजूद परिजनों की आंखों में आंसू तो थे, लेकिन वे खुशी के थे। पद्मा ने अपनी किडनी का दान कर न केवल अपने भाई को नया जीवन दिया है, बल्कि समाज के सामने त्याग की एक ऐसी कहानी लिखी है, जिसे लोग याद रखेंगे। आज नवलकिशोर को एक नई सांस मिली है और पद्मा का यह त्याग चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इस साहसी कदम की सराहना कर रहे हैं, जो साबित करता है कि खून के रिश्तों में संवेदनाएं और त्याग आज भी जीवित है।