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पन्ना में केन-बेतवा परियोजना के विस्थापितों का आंदोलन 12वें दिन भी जारी, सूली सत्याग्रह शुरू

Ken Betwa Project Displaced Protest: केन-बेतवा, मझगांय और रुंझ परियोजना के विस्थापितों का आंदोलन, बुधवार को 12वें दिन प्रदर्शनकारियों ने सूली सत्याग्रह शुरू किया।
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Sep 23, 2026
panna protest
ken betwa project displaced protest suli satyagraha, केन-बेतवा परियोजना के विस्थापितों के आंदोलन का 12वां दिन (Source-Patrika)

Ken Betwa Project Displaced Protest: मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में केन-बेतवा, मझगाय, रुंझ और सिंगरौली-ललितपुर रेल लाइन सहित विभिन्न परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापितों का चिता आंदोलन बुधवार को 12वें दिन भी जारी रहा। अब तक चिता सत्याग्रह, मिट्टी सत्याग्रह और जल सत्याग्रह कर चुके आंदोलनकारियों ने बुधवार से सूली सत्याग्रह भी शुरू कर दिया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि विरोध के अलग-अलग प्रतीकात्मक तरीकों के बावजूद प्रभावित परिवारों की समस्याओं का अपेक्षित निराकरण नहीं हो रहा है।

15 साल बाद भी मुआवजा और पुनर्वास के मामले लंबित

आंदोलन से जुड़े अमित भटनागर ने कहा कि जिस परियोजना की प्रक्रिया को 15 वर्ष से अधिक समय हो चुका है, उसके बावजूद प्रभावित परिवारों के मुआवजा और पुनर्वास के मामले लंबित रहना गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि राज्य का अपने ही बनाए कानून का पालन न करना चिंता का विषय है। उनके अनुसार यदि कानून प्रभावितों के अधिकार और पुनर्वास की व्यवस्था करता है तो डूब क्षेत्र में आने से पहले उसका पालन सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रभावितों की सूची, मुआवजा, पुनर्वास और संपत्तियों के मूल्यांकन से जुड़े कई मामले अभी भी लंबित हैं।

प्रशासन के दावों पर उठाए सवाल

दूसरी ओर प्रशासन की ओर से प्रभावितों के मामलों के निराकरण और गांव-गांव जाकर कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है। आंदोलनकारी प्रशासन के इन दावों के बीच प्रभावित परिवारों की जमीनी स्थिति को लेकर सवाल उठा रहे हैं। भटनागर ने कहा कि गांव डूब रहे हैं, घर डूब रहे हैं और जिंदगियां डूब रही हैं, लेकिन जिम्मेदारों की बेशर्मी तैर रही है। उन्होंने आंदोलनकारियों को नोटिस और अन्य प्रशासनिक कार्रवाइयों के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए इसे आंदोलन का नहीं, लोकतंत्र का दमन बताया। पिछले 12 दिनों से प्रभावित ग्रामीण अलग-अलग तरीकों से विरोध दर्ज करा रहे हैं। आंदोलनकारियों के अनुसार चिता से लेकर सूली तक के प्रतीकात्मक सत्याग्रह का उद्देश्य मुआवजा और पुनर्वास के बिना विस्थापन की प्रक्रिया से पैदा होने वाले संकट को सामने लाना है। उनका कहना है कि उनका संघर्ष न्याय, उचित मुआवजे, पुनर्वास और कानून के पालन के लिए है।

Updated on:
23 Sept 2026 06:07 pm
Published on:
23 Sept 2026 06:07 pm