पटना

‘शराब बेचें, राजस्व आता है, लेकिन बच्चों को ध्यान सिखाओ’ शराबबंदी पर अवध ओझा का बड़ा बयान

बिहार में शराबबंदी पर अवध ओझा सर का कहना है कि बिहार को विकास के लिए राजस्व चाहिए तो शराब बेचें, लेकिन बच्चों को स्कूल में मेडिटेशन सिखाएं, ताकि वो इतने मजबूत हो जाएं कि कोई खरीदार ही न बचे।

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Apr 02, 2026
अवध ओझा की फोटो

बिहार में साल 2016 से लागू पूर्ण शराबबंदी को लेकर अक्सर राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ जाती है। बीते दिनों बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने कहा था कि अब शराब चालू कर देनी चाहिए। अब इस विषय पर चर्चित शिक्षक अवध ओझा ने भी बयान दिया है। ओझा सर का मानना है कि बिहार जैसे राज्य को विकास के लिए भारी राजस्व की जरूरत है और शराब इसमें एक बड़ा जरिया बन सकती है। हालांकि, उन्होंने केवल शराब बेचने की वकालत नहीं की, बल्कि एक अनोखा तरीका बताया जिससे शराब की बिक्री कम हो जाएगी।

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शराब से राजस्व आता है- अवध ओझा

अवध ओझा ने कहा कि शराब की बिक्री शुरू करने में कोई समस्या नहीं है, क्योंकि इससे राज्य को बड़ा राजस्व (Revenue) मिलता है। उन्होंने कहा, 'अगर आप शराब बेचते हैं और आपको उससे राजस्व मिलता है, तो यह अच्छी बात है। उत्पाद शुल्क राजस्व का एक बहुत बड़ा स्रोत है और बिहार जैसे राज्य को विकास के लिए पैसों की सख्त जरूरत है। इसलिए इसे खोल दें, कोई समस्या नहीं है। लेकिन एहतियात बरतना चाहिए।'

तनाव में नशा करता है इंसान - ओझा सर

शराब खोलने के बाद बढ़ने वाले नशे पर ओझा सर ने एक शिक्षक के नजरिए से समाधान दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि बिहार के स्कूलों में बच्चों को शुरुआत से ही ध्यान यानि की मेडिटेशन और योग सिखाया जाना चाहिए। ओझा सर के मुताबिक, इंसान तनाव, चिंता और अवसाद में नशा करता है। अगर बिहार के लोग और बच्चे ध्यान करना शुरू कर दें, तो शराब खरीदने वाला कोई बचेगा ही नहीं। उनका तर्क है कि जब लोग मानसिक रूप से मजबूत होंगे, तो शराब की दुकानों के खुलने के बावजूद कोई खरीदार नहीं होगा।

अवध ओझा ने की नीतीश कुमार के फैसले की तारीफ

अवध ओझा ने नीतीश कुमार के शराब पर पूरी तरह से बैन लगाने के फैसले की तारीफ़ की। उन्होंने कहा कि उस समय नीतीश कुमार का यह फैसला बहुत ही बढ़िया था, क्योंकि राज्य की आबादी का एक बड़ा हिस्सा मजदूर वर्ग का है। ये लोग दिन भर काम करके मजदूरी कमाते थे और रात को घर लौटकर शराब पीते थे। नतीजतन, नीतीश कुमार के इस फैसले से महिलाओं को सबसे ज्यादा राहत मिली है।

अवध ओझा ने यह भी कहा कि शराब की बिक्री पर से बैन हटाने से पहले, कुछ ऐसे विकल्प जरूर तैयार किए जाने चाहिए ताकि महिलाओं और बहनों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। अब भविष्य में बिहार में मल्टीनेशनल कंपनियां आएंगी, तो वहां काम करने वाले लोग शराब पीना चाहेंगे। ऐसा तो होगा नहीं कि वे सिर्फ एक ड्रिंक के लिए पटना से गोरखपुर जाएंगे, बाकी ठीक है, शराब की बिक्री पर से बैन हटाने में कोई आपत्ति नहीं है।

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Published on:
02 Apr 2026 02:31 pm
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