
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फोटो- X@NitishKumar )
बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार अब दिल्ली की राजनीति में एक नई पारी शुरू करने के लिए तैयार हैं। राज्य सभा के लिए निर्वाचित होने के बाद उन्होंने 30 मार्च 2026 को बिहार विधान परिषद (MLC) की अपनी सदस्यता से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया। जिसके बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि वह 10 अप्रैल को राज्य सभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे और खरमास के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इसी बीच गृह विभाग ने एक आदेश जारी किया है जिसमें कहा गया है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार की सुरक्षा Z+ श्रेणी के स्तर पर बनी रहेगी।
गृह विभाग की विशेष शाखा द्वारा जारी एक आदेश के अनुसार, मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार को Z+ श्रेणी की सुरक्षा मिलती रहेगी। यह निर्णय बिहार विशेष सुरक्षा अधिनियम 2000 के प्रावधानों के अनुसार लिया गया है। गृह विभाग ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी सुरक्षा स्थिति की उच्च-स्तरीय समीक्षा की गई थी। राज्य की चुनौतीपूर्ण सुरक्षा स्थिति और उनके VVIP दर्जे को देखते हुए, यह निर्णय लिया गया कि पद छोड़ने के बाद भी उनकी सुरक्षा का स्तर कम नहीं किया जाएगा।
Z+ सुरक्षा देश में प्रदान की जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था के उच्चतम स्तरों में से एक है। इस प्रोटोकॉल के तहत नीतीश कुमार के आसपास चौबीसों घंटे लगभग 55 प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। सबसे अंदरूनी सुरक्षा घेरे की जिम्मेदारी 10 से अधिक राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) कमांडो की एक टीम पर होती है। इसके अतिरिक्त, सुरक्षा दस्ते में CRPF, ITBP, या स्थानीय पुलिस बल के जवान भी शामिल होते हैं। सुरक्षा काफिले में अनिवार्य रूप से एक एस्कॉर्ट वाहन और एक बुलेट-प्रूफ वाहन शामिल होता है।
यह सुरक्षा दिन के 24 घंटे तीन अलग-अलग घेरों (layers) में काम करती है। जिसके इनर रिंग में NSG कमांडो शामिल होते हैं। इसके बाद मिड रिंग में केंद्रीय सुरक्षा बल और आउटर रिंग में राज्य पुलिस की तैनाती होती है।
नीतीश कुमार का राज्य सभा में प्रवेश भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक दुर्लभ उपलब्धि है। वह देश के उन चुनिंदा राजनेताओं में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था के चारों सदनों का प्रतिनिधित्व किया है। नीतीश कुमार ने लोकसभा में सांसद के तौर पर, बिहार विधानसभा में विधायक के तौर पर, बिहार विधान परिषद में MLC के तौर पर सेवा दी है और अब वह राज्य सभा के सदस्य के तौर पर संसद जा रहे हैं।
नीतीश कुमार 16 मार्च 2026 को राज्यसभा के लिए चुने गए थे। संवैधानिक नियमों के अनुसार संसद के लिए चुने गए किसी भी सदस्य को अपने चुनाव के 14 दिनों के भीतर राज्य विधानमंडल में अपनी सीट खाली करनी होती है। इस नियम का पालन करते हुए, उन्होंने 30 मार्च को अपना इस्तीफा दे दिया। अब उम्मीद है कि वह 10 अप्रैल को सांसद के तौर पर शपथ लेंगे।
Updated on:
02 Apr 2026 09:19 am
Published on:
02 Apr 2026 09:19 am
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