पटना

Bankipur Bypoll Result: बांकीपुर में पलटते रुझान! जनसुराज कार्यालय में जश्न, बीजेपी दफ्तर में फीकी पड़ने लगी लड्डुओं की मिठास

Bankipur Bypoll Result बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझानों ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। 30 वर्षों से भाजपा के कब्जे वाली इस सीट पर जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर को बढ़त मिलने के बाद पार्टी कार्यालय में जश्न की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
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Aug 03, 2026
bankipur bypoll result
जनसुराज के कार्यकर्ता जश्न मनाते, बीजेपी ऑफिस में पसरा सन्नाटा

Bankipur Bypoll Result: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की मतगणना के शुरुआती राउंड में बढ़त मिलने के बाद जनसुराज कार्यालय में जश्न का माहौल बन गया है। पार्टी कार्यालय में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने संभावित जीत के बाद धन्यवाद यात्रा की तैयारी भी शुरू कर दी है। भाजपा के लंबे समय से माने जाने वाले गढ़ में बढ़त मिलने से जनसुराज खेमे में उत्साह का माहौल है। शुरुआती रुझानों में बढ़त मिलने के बाद जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने दावा किया कि "जीत हो चुकी है, अब सिर्फ औपचारिक घोषणा बाकी है।" इसके बाद वह मतगणना स्थल से बाहर निकल गए।

भाजपा कार्यालय में सन्नाटा

वहीं, दूसरी ओर भाजपा कार्यालय में फिलहाल सन्नाटा पसरा हुआ है। पार्टी की ओर से जीत के जश्न की जो तैयारियां की गई थीं, उन्हें फिलहाल रोक दिया गया है। कार्यकर्ताओं ने जीत की खुशी में लड्डू तैयार कराए थे, लेकिन शुरुआती रुझानों के बाद उन्हें हटा दिया गया है। शुरुआती मतगणना में कायस्थ बहुल इलाकों से भाजपा को अपेक्षित बढ़त नहीं मिली और पार्टी पांच हजार से अधिक वोटों से पीछे चल रही है। अभी मुस्लिम बहुल इलाकों के मतों की गिनती शुरू नहीं हुई है।

30 वर्षों से भाजपा का गढ़ रही है बांकीपुर सीट

बांकीपुर विधानसभा सीट पर पिछले करीब 30 वर्षों से भाजपा का कब्जा रहा है। वर्ष 1995 में नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने पहली बार इस सीट पर भाजपा को जीत दिलाई थी। इसके बाद नितिन नवीन लगातार इस सीट से चुनाव जीतते रहे। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद नितिन नवीन राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो गए। राज्यसभा सदस्य बनने के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया, जिसके कारण यह सीट रिक्त हुई और उपचुनाव कराना पड़ा।

भाजपा इस सीट को अपनी परंपरागत और सबसे मजबूत सीट मानकर चुनाव लड़ रही थी। हालांकि, जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर चुनावी मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया। मतदान के बाद अधिकांश राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि भाजपा इस सीट पर बढ़त बनाए रखेगी, लेकिन चुनाव बाद आए कई सर्वेक्षणों में प्रशांत किशोर को बढ़त मिलती दिखाई गई। भाजपा ने इन सर्वेक्षणों को खारिज करते हुए जीत का भरोसा जताया था और जश्न की व्यापक तैयारियां भी कर ली थीं। इसी के तहत लड्डू, बैंड-बाजा और अन्य उत्सव संबंधी इंतजाम पहले से किए गए थे। हालांकि, शुरुआती मतगणना के रुझानों ने पार्टी की इन तैयारियों पर फिलहाल विराम लगा दिया है।

Updated on:
03 Aug 2026 01:54 pm
Published on:
03 Aug 2026 01:27 pm