राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, बांकीपुर का यह उपचुनाव दो अलग-अलग चुनावी मॉडलों की टक्कर बन गया। एक ओर जन सुराज का डेटा, रिसर्च और प्रोफेशनल्स पर आधारित आधुनिक चुनावी अभियान था, तो दूसरी ओर बीजेपी का मजबूत संगठन, कैडर और बूथ स्तर तक फैला चुनावी नेटवर्क। सूत्रों के अनुसार, प्रशांत किशोर ने बीजेपी और आरजेडी के नाराज वोटरों को साधने की रणनीति अपनाई। उन्होंने भरत तिवारी एनकाउंटर, नीट छात्रा हत्याकांड और यूजीसी से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर बीजेपी के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की। इसके साथ ही उन्होंने विकास को भी चुनावी मुद्दा बनाया। चुनाव प्रचार के दौरान कई स्थानों पर एनडीए नेताओं को विरोध का सामना भी करना पड़ा। हालांकि बूथ प्रबंधन, संगठनात्मक मजबूती और परंपरागत वोट बैंक के मामले में बीजेपी की बढ़त साफ दिखाई दी।