
नितिन नबीन- प्रशांत किशोर और तेजस्वी यादव
Bankipur By Election बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में सिर्फ 34.16 फीसदी मतदान ने सियासी गणित को उलझा दिया है। कम वोटिंग प्रतिशत ने भाजपा और जन सुराज दोनों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा अपनी पारंपरिक बढ़त बरकरार रख पाएगी या प्रशांत किशोर जातीय समीकरण और वोट बैंक में सेंधमारी के दम पर बड़ा उलटफेर करने में सफल होंगे?
इस चुनाव में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार नीरज सिन्हा और जन सुराज के प्रत्याशी प्रशांत किशोर के बीच रहा। जातीय समीकरणों के आधार पर भाजपा को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है, जबकि कुछ सर्वे रिपोर्टों में प्रशांत किशोर को मजबूत स्थिति में बताया गया है। पिछले चुनाव में दो नंबर पर रहने वाली आरजेडी इस चुनाव में मुख्य मुकाबला से बाहर दिखी।
बांकीपुर में कुल 34.16 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। अपेक्षाकृत कम मतदान प्रतिशत ने भाजपा और जन सुराज, दोनों ही खेमों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, इस सीट का इतिहास बताता है कि कम मतदान के बावजूद भाजपा यहां पहले भी जीत दर्ज करती रही है। मतदान के बाद भाजपा ने संवाददाता सम्मेलन कर जीत का दावा किया। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि बांकीपुर की जनता ने एक बार फिर भाजपा पर भरोसा जताया है और पार्टी इस सीट पर जीत दर्ज करेगी। वहीं, जन सुराज के संस्थापक और उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने भी अपनी जीत को लेकर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि वह "200 प्रतिशत आश्वस्त" हैं।
चुनाव प्रचार से लेकर मतदान के दिन बूथों के माहौल तक प्रशांत किशोर ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि उन्होंने भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक में भी कुछ हद तक सेंध लगाने की कोशिश की। वहीं, कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि उन्होंने आरजेडी के कुछ परंपरागत मतदाताओं को भी अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास किया। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, मुस्लिम मतदाताओं के एक वर्ग और सवर्ण समुदाय के कुछ वोटों में भी प्रशांत किशोर को समर्थन मिलने की चर्चा है। खासकर ब्राह्मण मतदाताओं के एक हिस्से के रुझान को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और वास्तविक तस्वीर मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगी।
सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि कायस्थ और कोयरी/कुशवाहा समाज को छोड़कर प्रशांत किशोर ने कई अन्य सामाजिक वर्गों में अपनी पैठ बनाने की कोशिश की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि वह भाजपा के पारंपरिक सामाजिक समीकरण में बड़ी सेंध लगाने में सफल रहे होंगे, तो मुकाबला उनके लिए आसान हो सकता है। हालांकि, भाजपा के मजबूत संगठनात्मक नेटवर्क और लंबे समय से इस सीट पर उसकी पकड़ को देखते हुए अंतिम निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी। अब सभी की निगाहें मतगणना और चुनाव परिणाम पर टिकी हैं।
Updated on:
31 Jul 2026 11:09 pm
Published on:
31 Jul 2026 11:06 pm
