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Bankipur Bypoll Result: तीसरे स्थान पर सिमटी RJD, BJP-जन सुराज के बीच टक्कर, बाबा हरिहरनाथ की शरण में पहुंचे तेजस्वी

Bankipur Bypoll Result बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझानों ने बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है। शुरुआती पांच राउंड के बाद मुकाबला भाजपा और जन सुराज के बीच दिख रहा है, जबकि आरजेडी तीसरे स्थान पर खिसक गई है।
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Tejashwi Yadav

बाबा हरिहर नाथ की शरण में पहुंचे तेजस्वी यादव

Bankipur Bypoll Result: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की मतगणना के शुरुआती राउंड में ही आरजेडी मुकाबले से बाहर होती नजर आ रही है। 31 राउंड की मतगणना में शुरुआती छह राउंड के बाद मुकाबला भाजपा और जन सुराज के बीच दिख रहा है। पहले छह राउंड की गिनती में जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर भाजपा उम्मीदवार पर 2632 वोटों की बढ़त बनाए हुए हैं। वहीं, आरजेडी उम्मीदवार रेखा गुप्ता तीसरे स्थान पर हैं। इसी बीच चुनावी चर्चा के दौरान आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बाबा हरिहरनाथ मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की।

प्रशांत की रणनीति, RJD का वोट बैंक बिखरा

चुनाव प्रचार से लेकर मतदान के दिन तक बूथों के माहौल में प्रशांत किशोर ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्होंने भाजपा और आरजेडी दोनों के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति अपनाई, जिसका असर शुरुआती रुझानों में भी दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर, इस चुनाव में आरजेडी शुरुआत से ही मुख्य मुकाबले में नजर नहीं आई। तेजस्वी यादव ने प्रचार के अंतिम दो दिनों में जोरदार अभियान चलाकर अपने पारंपरिक वोटरों को एकजुट करने की कोशिश की, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। माना जा रहा है कि पार्टी का पारंपरिक वोट बैंक भाजपा और जन सुराज के बीच बंट गया।

RJD तीसरे नंबर पर

सूत्रों के अनुसार, मतदान के दिन ही तेजस्वी यादव को इस स्थिति का आभास हो गया था। यही वजह रही कि उन्होंने पार्टी कार्यालय में करीब पांच घंटे तक बैठकर हर बूथ की समीक्षा की। यह भी चर्चा है कि इस दौरान उन्होंने चुनावी रणनीति को लेकर पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से नाराजगी जताई। आरजेडी के तीसरे स्थान पर पहुंचने के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या बिहार की राजनीति में विपक्ष के रूप में जन सुराज नई ताकत बनकर उभर रही है। दरअसल, पूरे चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने खुद को भाजपा और आरजेडी, दोनों के विकल्प के रूप में पेश किया। उन्होंने कई सभाओं में दावा किया था कि उन्हें उन भाजपा समर्थकों का भी वोट मिलेगा, जो विकल्प के अभाव में भाजपा को वोट देते रहे हैं, और उन मतदाताओं का भी समर्थन मिलेगा, जो आरजेडी का विकल्प नहीं होने के कारण उसके साथ रहे हैं।

शुरुआती रुझानों को देखते हुए माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर की यह रणनीति कुछ हद तक सफल होती दिखाई दे रही है और उन्हें दोनों दलों के पारंपरिक वोट बैंक से समर्थन मिला है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि आरजेडी का एक वर्ग भाजपा के पक्ष में भी शिफ्ट हुआ है।

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