
Begusarai Road accident: बिहार के बेगूसराय में NH-31 पर हुए एक भयानक सड़क हादसे में मधेपुरा जिले के तीन थाना प्रभारी (SHO) समेत चार लोगों की मौत हो गई। वे पटना में एक दिन की सरकारी ट्रेनिंग पूरी करके सरकारी गाड़ी से अपने ज़िले लौट रहे थे। जब अरार पुलिस स्टेशन के SHO ज्ञानेंद्र अमरेंद्र की मौत की खबर मिलते ही उनके पैतृक गांव में मातम छा गया। गांव का हर निवासी अपने चहेते 'डब्बू' (ज्ञानेंद्र का निकनेम) के लिए शोक में डूबा था।
ज्ञानेंद्र की मौत की खबर सुनकर उनकी बहन सुलेखा फूट-फूटकर रोने लगीं। सुलेखा को फरवरी में हुई उनकी आखिरी मुलाकात याद आई, जब ज्ञानेंद्र अपनी भांजी की शादी में शामिल होने गांव आए थे। परिवार वालों ने बताया कि शादी के कार्यक्रमों के दौरान ज्ञानेंद्र सबसे ज़्यादा उत्साहित और खुशमिजाज इंसान थे और उन्होंने पूरे परिवार के साथ अच्छा समय बिताया था।
ज्ञानेंद्र की बहन सुलेखा ने रोते हुए बताया कि कुछ दिन पहले ही उनकी ज्ञानेंद्र से वीडियो कॉल पर बात हुई थी। ज्ञानेंद्र ने उनसे कहा था कि वे अभी ससुराल न जाएं, बल्कि एक महीना और इंतज़ार करें। उसने कहा था कि वे जल्द ही घर आ रहा है और उनसे मिलने के बाद ही वहां जाएं। उसने मुझसे वादा किया था कि वे जल्द ही लौट आएगा।
घर के आंगन में बैठी ज्ञानेंद्र की 80 वर्षीय बुजुर्ग मां कौशल्या देवी की स्थिति देखकर वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा कांप उठा। वे अपने कांपते हाथों से बार-बार अपनी बेटी के आंसू पोंछने की कोशिश करतीं और फिर खुद आसमान की तरफ देखकर बिलख पड़तीं। मां बार-बार कह रही थीं कि भगवान ये क्या अनर्थ कर दिया। जाने की उम्र मेरी थी, इस बूढ़ी मां को छोड़कर मेरा जवान बेटा चला गया।
इस बीच, उनके पिता योगेंद्र कुमार यादव बेटे को खोने के गम में बार-बार बेहोश हो रहे थे। उन्होंने खेती और प्राइवेट ट्यूशन के ज़रिए अपने बच्चों को पाला-पोसा और उन्हें कामयाब बनाया। ग्रामीणों ने भारी मन से कहा कि ज्ञानेंद्र सिर्फ़ एक सरकारी अफ़सर ही नहीं, बल्कि परिवार के 'एक अनमोल रत्न' थे, जिन्होंने कड़ी मेहनत से पुलिस सेवा में यह मुकाम हासिल किया था।
शहीद ज्ञानेंद्र अमरेंद्र की पत्नी अनिमा कुमारी और उनका इकलौता बेटा हर्ष कुमार अमूमन कटिहार में ही रहते थे, जहां बेटा पढ़ाई करता है। स्कूल में गर्मी की छुट्टियां होने के कारण कुछ दिन पहले ही मां-बेटे ज्ञानेंद्र के पास मधेपुरा गए हुए थे ताकि पिता के साथ कुछ वक्त बिता सकें। मासूम बेटे को क्या मालूम था कि जिन पापा के पास वह छुट्टियां बिताने आया था, उनके साथ यह सफर इतनी जल्दी खत्म हो जाएगा।
यह दुर्घटनाउस वक्त हुई जब ज्ञानेंद्र अमरेंद्र अपने दो अन्य साथी थाना प्रभारियों (बेलारी SHO नीरज कुमार और रतवारा SHO साजन पासवान) तथा ड्राइवर नीरज कुमार के साथ पटना में आयोजित एक दिवसीय सरकारी प्रशिक्षण पूरा कर वापस मधेपुरा लौट रहे थे। शुक्रवार को बेगूसराय के साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र के बखड्डा के पास उनकी तेज रफ्तार कार सड़क किनारे खड़े एक अनियंत्रित ट्रक से पीछे से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। ज्ञानेंद्र समेत तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
शहीदों के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव भेजने से पहले कोसी क्षेत्र सहरसा के पुलिस उपमहानिरीक्षक, मधेपुरा के जिलाधिकारी, मधेपुरा के पुलिस अधीक्षक एवं सहरसा के पुलिस अधीक्षक सहित सभी वरीय अधिकारियों, पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों द्वारा भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। सभी अधिकारियों ने दिवंगत पुलिस अवर निरीक्षक ज्ञानानन्द अमरेंद्र, जो कटिहार के रहने वाले और अरार के थानाध्यक्ष थे, गया निवासी बेलारी के थानाध्यक्ष स्वर्गीय नीरज कुमार तथा कैमूर निवासी रतवारा के थानाध्यक्ष स्वर्गीय साजन पासवान के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
शहीद SHO के गांव में सुबह से ही प्रशासनिक अधिकारियों और राजनीतिक दिग्गजों का तांता लगा हुआ है। मनिहारी थानाध्यक्ष संतोष कुमार झा और मनिहारी डीएसपी विनोद कुमार ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। भाजपा विधायक निशा सिंह ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए इसे पुलिस महकमे और कटिहार जिले के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है। शहीद ज्ञानेंद्र अमरेंद्र का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा, जहां बिहार पुलिस के जवान अपने जांबाज साथी को सलामी देंगे।