Bhojpur Encounter: भोजपुर के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता अश्विनी चौबे ने इसे "मर्डर" बताया, जबकि जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। कांग्रेस नेता असित नाथ तिवारी ने इसे फर्जी एनकाउंटर करार देते हुए सरकार पर निशाना साधा, वहीं शाहपुर में ग्रामीणों ने विरोध-प्रदर्शन किया।

Bhojpur Encounter: बिहार के भोजपुर जिले में भरत तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। इस मामले को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर भी सवाल उठने लगे हैं। भाजपा और जदयू के कई नेताओं ने घटना पर चिंता जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने पुलिस-प्रशासन पर निशाना साधते हुए भरत तिवारी के एनकाउंटर को "मर्डर" करार दिया। वहीं, जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा, "जो वीडियो सामने आया है और जो हमने देखा है, उससे निश्चित रूप से संदेह पैदा होता है। राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है, लेकिन केवल इतना पर्याप्त नहीं है। यदि पुलिसकर्मी भी कोई अपराध करते हैं, तो उन्हें भी बख्शा नहीं जाना चाहिए।"
उधर, भाजपा नेता और बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी घटना पर सवाल उठाते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस को पहले युवक के आपराधिक इतिहास की पूरी जानकारी जुटानी चाहिए थी। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि कार्रवाई आवश्यक थी, तो उसे कानून के दायरे में रहकर किया जाना चाहिए था।
कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने भी इस मामले को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भोजपुर के भारत भूषण तिवारी भाजपा की कथित जातीय और विभाजनकारी राजनीति के शिकार हुए हैं। तिवारी का आरोप है कि देशभर में दलित, आदिवासी, यादव, अल्पसंख्यक और ब्राह्मण समुदाय के लोग इस तरह की राजनीति से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि फर्जी मुकदमों के जरिए लोगों को जेल भेजा जा रहा है और फर्जी मुठभेड़ों के माध्यम से उनकी हत्या की जा रही है।
वहीं, भोजपुर के शाहपुर क्षेत्र में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने इस घटना को कथित फर्जी एनकाउंटर बताते हुए सड़क पर उतरकर विरोध-प्रदर्शन किया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
शाहपुर के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर पुलिस और प्रशासन को चुनौती दे रहा था। वायरल वीडियो में वह कथित तौर पर अवैध पिस्टल लहराते हुए एक एसडीएम को जान से मारने की धमकी देता दिखाई दे रहा था। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस उसे गिरफ्तार करने के लिए उसके घर पहुंची। पुलिस के अनुसार, मंगलवार को गिरफ्तारी के दौरान भरत भूषण तिवारी ने पुलिसकर्मियों पर पिस्टल तान दी और फायरिंग भी की, जिसमें पुलिसकर्मी बाल-बाल बच गए।
इसके बाद बुधवार सुबह भोजपुर एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर उसे घेर लिया। पुलिस और भरत भूषण तिवारी के बीच हुई मुठभेड़ में वह घायल हो गया। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उसे इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
भोजपुर पुलिस की ओर से मंगलवार और बुधवार को जारी की गई प्रेस विज्ञप्तियों ने पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इन्हीं बयानों के कारण पुलिस खुद अपने दावों को लेकर कटघरे में नजर आ रही है। मंगलवार को भोजपुर एसपी राज ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया था कि सुबह करीब 9 बजे शाहपुर थाना पुलिस को सूचना मिली कि एक व्यक्ति पिस्तौल लहराते हुए घूम रहा है और हवा में फायरिंग कर रहा है। बयान के अनुसार, स्थानीय पुलिस और भोजपुर एसटीएफ की टीम ने उसे कई बार आत्मसमर्पण करने के लिए कहा, लेकिन वह रुक-रुक कर पुलिस पर फायरिंग करता रहा, जिससे पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया।
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया था कि जब पुलिस टीम उसके घर पहुंची तो पता चला कि वायरल वीडियो में दिख रहा व्यक्ति “मानसिक रूप से अस्वस्थ” है। पुलिस ने यह भी दावा किया था कि उसे मानसिक स्वास्थ्य संस्थान भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही लोगों से मामले से जुड़े “भ्रामक” वीडियो और सूचनाएं प्रसारित नहीं करने की अपील की गई थी।
हालांकि, अगले ही दिन बुधवार को जारी दूसरी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि बुलेटप्रूफ जैकेट पहने एसटीएफ जवानों ने भरत भूषण तिवारी की घेराबंदी करने की कोशिश की। इस दौरान तिवारी ने पुलिस टीम पर गोली चलाई, जिसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई में उसके पैरों में गोली लगी। घायल अवस्था में उसे तत्काल पटना ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस के इन दोनों लिखित बयानों को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि पहले व्यक्ति को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताते हुए उसके उपचार की बात की गई, जबकि कुछ ही घंटों बाद हुए एनकाउंटर और उसकी मौत ने पुलिस की कार्रवाई तथा उसके दावों को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है।