
Bharat Bhushan Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में एक नया विवाद सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, जिला प्रशासन ने भरत भूषण तिवारी की स्मृति में प्रस्तावित स्मारक के निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है। इसके बाद बिलौटी गांव से लेकर पटना तक सियासी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों का दावा है कि प्रशासन के इस कदम के विरोध में मंगलवार (30 जून) को बड़ा विरोध प्रदर्शन हो सकता है। इसी दिन भरत भूषण तिवारी का श्राद्ध भी है, जिसमें दूर-दूर से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रशासन ने भूमि विवाद का हवाला देते हुए निर्माण कार्य पर रोक लगाई है। सूत्रों का कहना है कि जिस स्थान पर भरत तिवारी का एनकाउंटर हुआ था, वहीं स्मारक निर्माण का कार्य शुरू कर दिया गया था और वहां ईंटें भी रखी जा चुकी थीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वहां आने वाले कई लोग उस स्थान की मिट्टी अपने माथे से लगाकर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे। इससे पहले उत्तराखंड के स्वामी आनंद स्वरूप महाराज बिलौटी पहुंचकर भरत भूषण तिवारी के परिजनों से मिले थे। उन्होंने प्रस्तावित स्मारक स्थल पर प्रतीकात्मक रूप से पहली ईंट भी रखी थी। परिजनों के अनुसार, स्मारक निर्माण का पूरा खर्च स्वामी आनंद स्वरूप महाराज स्वयं वहन करने वाले थे।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शाहपुर के अंचलाधिकारी आनंद प्रकाश ने प्रस्तावित स्मारक निर्माण पर रोक लगाते हुए कहा कि जिस भूमि पर निर्माण कार्य किया जा रहा है, वह बिहार सरकार की भूमि है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता। इसी कारण प्रशासन ने स्मारक निर्माण का कार्य फिलहाल रोक दिया है।
भरत भूषण तिवारी के गांव बिलौटी में जिस स्थान पर उन्हें गोली लगी थी, वहीं उनकी स्मृति में प्रस्तावित स्मारक बनाया जाना था। इसी स्थल पर स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने प्रतीकात्मक रूप से पहली ईंट रखी थी। इसके बाद उस स्थान को ईंटों से घेर दिया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं और उस स्थान की मिट्टी अपने माथे से भी लगा रहे हैं। परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित स्मारक के निर्माण का पूरा खर्च उत्तराखंड स्थित मठ के स्वामी आनंद स्वरूप महाराज स्वयं वहन कर रहे हैं।