
Bharat Tiwari Encounter बिहार के भोजपुर में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर की गूंज अब बिहार से बाहर भी सुनाई दे रही है। इस मामले पर उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की नजीबाबाद विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार की एनडीए सरकार और भोजपुर पुलिस पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि "बिहार में एक ब्राह्मण युवक का फर्जी एनकाउंटर किया गया।" भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर का जिक्र करते हुए ओवैसी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए और सरकार को निशाने पर लिया।
ओवैसी ने कहा कि वह हमेशा से एनकाउंटर नीति के विरोधी रहे हैं और इसे पूरी तरह गलत मानते हैं। कानून और संविधान का हवाला देते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आरोपी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, तो पुलिस ने कानून अपने हाथ में क्यों लिया? उन्होंने आगे कहा कि अगर मौके पर ही पुलिस को फैसला करना है, तो फिर अदालतों की क्या आवश्यकता है। ऐसी स्थिति में अदालतों पर ताला लगा देना चाहिए और एनकाउंटर की व्यवस्था ही लागू कर देनी चाहिए।
इधर, बिहार सरकार ने भोजपुर जिले में हुए भरत भूषण तिवारी के कथित पुलिस एनकाउंटर केस में आरोपी बनाए गए जगदीशपुर के तत्कालीन सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर (SDPO) राजेश कुमार शर्मा को नई जिम्मेदारी सौंप दी है। बिहार सरकार के गृह विभाग की ओर से जारी 53 DSP की ट्रांसफर लिस्ट में उनका नाम शामिल है। एनकाउंटर मामले में आरोपी बनाए जाने के बाद पहले उन्हें फील्ड ड्यूटी से हटाकर पुलिस लाइन भेज दिया गया था, लेकिन अब उन्हें पटना में मद्यनिषेध विभाग में DSP के तौर पर तैनात किया गया है।
17 जून को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और स्थानीय पुलिस की टीम ने एक कथित एनकाउंटर में 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी को मार गिराया था। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में भरत तिवारी पुलिस के सामने सरेंडर करते हुए दिख रहे थे। इस वीडियो के सामने आते ही लोग आक्रोशित हो गए और एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग होने लगी।