
Bharat Tiwari Encounter:बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के बीच भरत तिवारी का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है, जिससे बिहार की सियासत गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी के स्टार प्रचारक और सांसद मनोज तिवारी ने जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर राजनीतिक लाभ के लिए पीड़ित परिवार पर चुनाव प्रचार करने का दबाव बना रहे थे। भरत तिवारी की मां ने भी एक निजी न्यूज चैनल से बातचीत में प्रशांत किशोर पर इसी तरह के आरोप लगाए हैं।
इसी बीच सोशल मीडिया पर भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के जवइनियां गांव का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। यह वही गांव है, जहां बाढ़ प्रभावित विस्थापित परिवारों को बसाया गया था। बताया जाता है कि इस बस्ती के विकास के लिए सरकार ने ₹114 करोड़ आवंटित किए थे। आरोप है कि विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और धन के दुरुपयोग का विरोध करने पर भरत तिवारी प्रशासन के खिलाफ मुखर हो गए थे। बाद में, पिछले महीने पुलिस मुठभेड़ में उनकी मौत हो गई, जिसे उनके परिजन और समर्थक फर्जी एनकाउंटर बताते रहे हैं। हालांकि, पुलिस ने इस आरोप से इनकार किया है। उधर, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दो दिन पहले भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात की थी। इसके बाद भोजपुर के तत्कालीन जगदीशपुर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) का तबादला कर उन्हें सामान्य प्रशासन विभाग में भेज दिया गया।
17 जून 2026 को पुलिस मुठभेड़ में भरत तिवारी की मौत के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई थी। परिजनों और समर्थकों ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इस मामले को लेकर बिहार ही नहीं, उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में लोग भोजपुर के बिलौटी गांव पहुंचकर भरत तिवारी के परिजनों के प्रति समर्थन जताने पहुंचे थे। मामला तूल पकड़ने के बाद प्रशासन ने जल्दबाजी में जवइनियां गांव के विस्थापित परिवारों को जमीन का पर्चा सौंपा और आंगनबाड़ी, बिजली, नल-जल सहित कई बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि बस्ती में मिट्टी भराई का काम अधूरा छोड़ दिया गया। भरत तिवारी लगातार इसी मुद्दे को उठाते रहे थे। अब बारिश के बाद पूरी बस्ती में पानी भर जाने से ग्रामीणों का कहना है कि भरत तिवारी की आशंका सही साबित हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि भरत तिवारी जिस खतरे को लेकर लगातार आवाज उठा रहे थे, आखिरकार वही हुआ। बाढ़ का पानी गांव में घुसने से उनका शहर और बाजार से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। पूरे गांव में जलभराव होने के कारण लोगों का घरों में रहना भी मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों ने कहा कि भरत तिवारी ने इस गांव और यहां के लोगों के अधिकारों के लिए अपनी जान तक दांव पर लगा दी। वे विस्थापित परिवारों की समस्याओं को लेकर लगातार संघर्ष करते रहे। ग्रामीणों का आरोप है कि इसी लड़ाई के दौरान वह पुलिस की गोली का शिकार हो गए। अब एक बार फिर पूरा गांव जलमग्न हो गया है, जिससे ग्रामीणों का कहना है कि भरत तिवारी की आशंकाएं सही साबित हुई हैं।