पटना

बिहार राजनीति का बड़ा उलटफेर, 20 साल से जिस सीट पर था BJP का कब्जा, जानिए वहां प्रशांत किशोर ने कैसे पलटी बाजी

Prashant Kishor: बिहार की बांकीपुर सीट पर हुए उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जन सुराज ने बीजेपी को 19 हजार वोटों से हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया है। जानिए इस ऐतिहासिक जीत के 5 मुख्य कारण।
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Aug 04, 2026
, Prashant Kishor vs Samrat Choudhary, Bankipur Assembly Bypoll 2026
बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन। (फोटो सोर्स- ANI)

Prashant Kishor Bankipur: बिहार की राजनीति में एक बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है। सिर्फ आठ महीने पहले जिस बांकीपुर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 52,000 से अधिक मतों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी, उसी सीट पर हुए उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के मुखिया प्रशांत किशोर ने 19,000 से अधिक वोटों से बड़ी जीत हासिल कर ली है।
वर्ष 1995 यानी पिछले 30 सालों से यह सीट बीजेपी का पक्का गढ़ रही है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई इस सीट को बचाने के लिए पार्टी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत 40 बड़े नेताओं को चुनाव मैदान में उतारा था। इसके बावजूद प्रशांत किशोर ने अपने पहले ही चुनावी में इतिहास रच दिया।

30 सालों का असंतोष और इलाके में विकास की कमी

बांकीपुर सीट पिछले 30 सालों से एक ही परिवार के पास थी। नितिन नवीन से पहले उनके पिता लगातार यहां से विधायक चुने जाते रहे। लंबे समय तक एक ही परिवार और पार्टी का कब्जा रहने के कारण स्थानीय लोगों में विकास न होने को लेकर अंदरूनी नाराजगी थी। प्रशांत किशोर ने किसी बड़े वादे के बजाय जमीनी और स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता दी। उन्होंने साफ कहा कि वे रातों-रात बदलाव का झूठा दावा नहीं करेंगे, लेकिन अगले दो-तीन महीनों में इलाके की व्यवस्था में जमीनी सुधार जरूर दिखने लगेगा।

बीजेपी के कोर अपर-कास्ट वोट बैंक में सेंध

बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में कायस्थ और भूमिहार मतदाताओं की अच्छी-खासी संख्या है, जिन्हें पारंपरिक रूप से बीजेपी का कैडर वोटर माना जाता रहा है। इस बार इस वोट बैंक में एकजुटता नहीं दिखी। खुद ब्राह्मण समाज से आने वाले प्रशांत किशोर अपनी साफ-सुथरी छवि के दम पर सवर्ण वोट बैंक के एक बड़े हिस्से को अपने साथ जोड़ने में कामयाब रहें।। 34% कम वोटिंग के बीच इस वोट बैंक का बंटना बीजेपी के लिए भारी पड़ा।

RJD के मुस्लिम-यादव (M-Y) वोट बैंक का टूटना

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार बांकीपुर में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का पारंपरिक 'M-Y' समीकरण पूरी तरह बिखर गया। बीजेपी को हराने की रणनीति के तहत मुस्लिम मतदाताओं के एक बड़े वर्ग ने आरजेडी के बजाय प्रशांत किशोर को अधिक मजबूत और सक्षम विकल्प माना। इसका सीधा असर यह हुआ कि आरजेडी प्रत्याशी सिर्फ 14,000 वोटों पर सिमट कर तीसरे स्थान पर खिसक गई, जिसने जन सुराज की जीत का रास्ता साफ कर दिया।

नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व पर बना पहला जनमत संग्रह

अप्रैल में JDU के नेता नीतीश कुमार के बाद सम्राट चौधरी ने बिहार के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली थी। इस उपचुनाव को सीधे तौर पर उनके नेतृत्व की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा था। चुनावी प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने इस लड़ाई को किसी सामान्य प्रत्याशी के बजाय सीधे अपने और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बीच का मुकाबला बना दिया। उन्होंने चौधरी की पढ़ाई और पुराने आपराधिक मामलों को लेकर लगातार हमला बोला, जिससे यह चुनाव राज्य स्तर की साख की लड़ाई बन गया।

Updated on:
04 Aug 2026 07:41 am
Published on:
04 Aug 2026 07:22 am