बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति के अनुसार, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका समेत 2.68 लाख परिवार आयुष्मान भारत योजना से जुड़ गए हैं ।
बिहार सरकार ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का दायरा बढ़ा दिया है । अब श्रमिक और फ्रंटलाइन वर्कर्स को बड़ी राहत मिली है। नीतीश सरकार के फैसले से आंगनबाड़ी सेविका, आशा कार्यकर्ता, सहायिका, सशस्त्र पुलिस बल के जवान और भवन निर्माण श्रमिकों को भी इसका लाभ मिलेगा। इनके परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मिलेगा।
स्वास्थ्य सुरक्षा समिति के मुताबिक, सरकार के इस फैसले से 17 लाख से ज्यादा कामगारों के परिवारों को फायदा मिलेगा । बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति के अनुसार, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका समेत 2.68 लाख परिवार आयुष्मान भारत योजना से जुड़ गए हैं । भवन निर्माण कर्मकार बोर्ड के 1426 श्रमिक परिवार भी इस योजना में शामिल हो गए हैं । श्रमिक के बीमार होने पर इलाज के लिए बीमा कवरेज श्रम संसाधन विभाग देगा। आशा, आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका समेत कुल लाभार्थियों की संख्या तीन लाख से ज्यादा है। सरकार असंगठित श्रमिकों और जमीनी स्तर के कर्मियों को गंभीर बीमारी में आर्थिक संकट से बचाना चाहती है। इसे सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है ।
आयुष्मान भारत योजना पूरे देश में करोड़ों परिवारों के लिए फ्री इलाज का सबसे बड़ा सहारा बनी हुई है। इसके तहत सालाना 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज की व्यवस्था है। लेकिन, सरकार ने इस योजना से जुड़े नियमों में एक अहम बदलाव करते हुए अब आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए आधार आधारित e-KYC जरूरी होगी। बिना e-KYC के न तो नया कार्ड बनेगा और न ही पुराने कार्ड पर किसी का भी इलाज होगा। सरकार के इस बदलाव के बाद जिनका रिकॉर्ड अधूरा है उनका फ्री इलाज रुक जायेगा।
सरकार के इस फैसले के बाद नेशनल हेल्थ अथॉरिटी ने कार्ड जारी करने का प्रोसेस को और सख्त कर दिया है। इसके लिए BIS 2.0 नाम की नई प्रणाली लागू कर दी गई है। इस सिस्टम के तहत लाभार्थी की पहचान आधार के जरिए ही होगी। ताकि गलत लोगों को योजना का लाभ नहीं मिल सके। सरकार ने अब फर्जीवाड़े को पकड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भी मदद लेना शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुासर जांच में अब तक हजारों आयुष्मान कार्ड संदिग्ध मिले हैं।