पटना

जमीन विवादित तो नहीं? रजिस्ट्री से पहले 13 बिंदुओं पर होगी ऑनलाइन जांच, बिहार में शुरू हो रही नई व्यवस्था

Bihar Land Registry: बिहार सरकार जमीन के लेन-देन में होने वाली धोखाधड़ी को खत्म करने के लिए एक नई व्यवस्था लागू करने जा रही है। अब बिहार में किसी भी जमीन के टुकड़े का रजिस्ट्रेशन होने से पहले राजस्व विभाग के पोर्टल पर 13 प्रमुख बिंदुओं पर अनिवार्य जांच होगी। 
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May 15, 2026
bihar land registry new rules
बिहार में जमीन रजिस्ट्री का नया नियम (फोटो-AI)

Bihar Land Registry:बिहार में अब जमीन खरीदना न केवल आसान होगा, बल्कि पूरी तरह सुरक्षित भी होगा। राज्य सरकार जमीन विवादों को जड़ से खत्म करने के लिए 'रजिस्ट्री से पहले जांच' की अनिवार्य व्यवस्था शुरू करने जा रही है। इस नई व्यवस्था के तहत, किसी भी प्लॉट की रजिस्ट्री तब तक नहीं होगी जब तक कि राजस्व विभाग के पोर्टल पर उसकी 13 प्रमुख बिंदुओं पर जांच पूरी नहीं हो जाती। सरकार का दावा है कि इस डिजिटल सुरक्षा कवच से जमीन की दोहरी बिक्री और गलत मालिकाना हक दिखाकर ठगी करने वाले गिरोहों पर लगाम लगेगी।

13 बिंदुओं पर होगी प्लॉट की जांच

नई व्यवस्था के तहत जमीन खरीदने से पहले खरीदार को विभाग के पोर्टल पर एक आवेदन देना होगा। इस आवेदन के आधार पर जमीन की पूरी कुंडली खंगाली जाएगी। जांच करने की जिम्मेदारी अंचल अधिकारी की होगी, जो इन 13 बिंदुओं को जांचेंगे।

  • जमाबंदीदार का नाम: क्या जमीन बेचने वाले व्यक्ति का नाम सरकारी रिकॉर्ड (पंजी-2) में दर्ज है?
  • खाता और खेसरा नंबर: क्या आवेदन में दिया गया खाता/खेसरा नंबर सरकारी रिकॉर्ड से मेल खाता है?
  • जमीन का रकबा (Area): विक्रेता जितनी जमीन बेच रहा है, क्या उसके पास रिकॉर्ड में उतनी जमीन शेष बची है?
  • जमीन की श्रेणी (Land Type): जमीन किस प्रकार की है, आवासीय, कृषि या व्यावसायिक?
  • कोर्ट केस/कानूनी विवाद: क्या उस जमीन को लेकर किसी भी न्यायालय में कोई मामला लंबित है?
  • बैंक लोन: क्या उस जमीन पर किसी बैंक से ऋण लिया गया है या वह बैंक के पास गिरवी रखी है?
  • जमीन का लगान: जमीन की पिछली रसीद कटी है या नहीं, क्या जमीन का सरकारी लगान अपडेटेड है?
  • सरकारी भूमि का दावा: क्या वह जमीन बिहार सरकार, खास महल, भूदान या किसी अन्य सरकारी संस्थान की तो नहीं है?
  • निषेध श्रेणी: क्या वह प्लॉट जिला प्रशासन द्वारा निषेध सूची (जैसे- तालाब, श्मशान, कब्रिस्तान या सार्वजनिक भूमि) में तो नहीं डाला गया है?
  • म्यूटेशन की स्थिति : क्या जमीन का पूर्व में दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) सही तरीके से पूर्ण हुआ है?
  • पारिवारिक बंटवारा: यदि जमीन पुश्तैनी है, तो क्या विक्रेताओं के बीच आपसी बंटवारा स्पष्ट और रिकॉर्ड में दर्ज है?
  • विवादित स्थल जांच: क्या मौके पर जमीन को लेकर कोई स्थानीय विवाद या धारा 144 जैसी स्थिति तो नहीं है?
  • स्वामित्व का प्रमाण: क्या विक्रेता के पास जमीन के मालिकाना हक से जुड़े सभी मूल दस्तावेज (केवाला या खतियान) उपलब्ध हैं?

जांच 10 दिनों के भीतर पूरी की जाएगी

इस प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने एक सख्त समय सीमा तय की है। जैसे ही कोई खरीदार पोर्टल पर आवेदन जमा करेगा, उसे सीधे संबंधित ब्लॉक कार्यालय के डैशबोर्ड पर भेज दिया जाएगा। सर्किल ऑफिसर और राजस्व कर्मचारियों को 10 दिनों के भीतर जमीन पर जाकर और रिकॉर्ड की जांच करके दोनों तरह का सत्यापन पूरा करना होगा और उसके बाद अपनी रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया तभी आगे बढ़ेगी, जब रिपोर्ट में यह पुष्टि हो जाए कि संबंधित जमीन को लेकर कोई विवाद नहीं है।

दलालों का दखल खत्म और म्यूटेशन होगा आसान

अक्सर देखा जाता है कि लोगों को जमीन से संबंधित जानकारी पाने के लिए ब्लॉक कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं, जहां आमतौर पर बिचौलिए और दलाल सक्रिय रहते हैं। यह नई डिजिटल व्यवस्था ऐसे बिचौलियों की भूमिका को पूरी तरह से खत्म कर देगी। अब खरीदार सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर सीधे तौर पर किसी भी संपत्ति की वास्तविक स्थिति का पता लगा सकेंगे। इसके अलावा, रजिस्ट्री के बाद होने वाले दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) में भी अब महीनों का समय नहीं लगेगा, क्योंकि रजिस्ट्री से पहले ही जमीन की जांच हो चुकी होगी। यह पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और परेशानी-मुक्त होने वाली है।

जमीन से जुड़े अपराध पर लगेगी लगाम

बिहार में जमीन विवादों के कारण होने वाली हत्याएं और आपराधिक घटनाएं पुलिस के लिए बड़ी चुनौती रही हैं। राजस्व विभाग के अधिकारियों का मानना ​​है कि यदि विवादित जमीन की रजिस्ट्री ही रोक दी जाए, तो इससे सामाजिक स्तर पर अपराध दर में काफी कमी आएगी।

Updated on:
15 May 2026 01:06 pm
Published on:
15 May 2026 01:06 pm