पटना

Bihar Politics: कार्यकर्ताओं को मनाने पहुंचे पप्पू यादव क्यों लेट गए जमीन पर? करारी हार के बाद कांग्रेस में घमासान

Bihar Politics: बिहार चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस पार्टी के अंदर विरोध तेज हो गया है। शुक्रवार को कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सदाकत आश्रम में बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। उन्हें शांत कराने के लिए पप्पू यादव भी पहुंचे और जमीन पर लेट गए।

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Nov 21, 2025
जमीन पर लेटे हुए सांसद पप्पू यादव

Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को मिली करारी हार के बाद कांग्रेस पार्टी के भीतर घमासान बढ़ गया है। कार्यकर्ताओं ने चुनाव के दौरान हुए टिकट वितरण पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार को पटना स्थित कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया। प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं को शांत कराने के लिए पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भी पहुंचे। उन्हें गुस्साए नेताओं का सामना करना पड़ा और देखते ही देखते हालात ऐसे बने कि पप्पू यादव खुद जमीन पर लेट गए।

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क्यों लेट गए पप्पू यादव?

जैसे ही पप्पू यादव गुस्साए कार्यकर्ताओं से बात करने सदाकत आश्रम पहुंचे, प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी तेज कर दी। कुछ देर तक बातचीत का प्रयास नाकाम रहने के बाद पप्पू यादव कार्यकर्ताओं के बीच जमीन पर लेट गए और कहा कि वो कार्यकर्ताओं से लड़ने नहीं, उनकी बात सुनने आए हैं। उनकी यह कोशिश भी प्रदर्शनकारियों को शांत नहीं कर सकी। भीड़ लगातार 'टिकट चोर, गद्दी छोड़' और 'कांग्रेस को बर्बाद करने वालों को बर्खास्त करो' जैसे नारे लगाती रही।

कार्यकर्ताओं का आरोप- टिकट बेचे गए

प्रदर्शनकारियों का गुस्सा साफ था। उनका कहना था कि कांग्रेस नेताओं ने चुनाव से ठीक पहले टिकट बेचे, जिसके कारण पार्टी को ऐतिहासिक हार का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु पर टिकट बिक्री में शामिल होने का आरोप लगाया। कार्यकर्ताओं ने मांग की कि दोनों नेताओं को तुरंत पद से हटाया जाए। कुछ कार्यकर्ताओं ने पप्पू यादव और दूसरे बड़े नेताओं को भी इस गलत टिकट वितरण के लिए जिम्मेदार ठहराया।

हार के बाद फूटा गुस्सा

बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की स्थिति बेहद खराब रही। 2020 में जहां पार्टी ने 19 सीटें जीती थीं, वहीं इस बार कांग्रेस सिर्फ 6 सीटों पर सिमट गई। रिजल्ट के बाद से ही पार्टी नेताओं, उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है। गठबंधन प्रबंधन से लेकर टिकट वितरण तक हर स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।

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