पटना

Bihar Tender Scam: 13 साल में 535 गुना बढ़ी रिशुश्री की आय, दुष्कर्म केस से खुला था बिहार का टेंडर सिंडिकेट

Bihar Tender Scam: बिहार में टेंडर सिंडिकेट से जुड़े ठेकेदार रिशुश्री का नाम सबसे पहले वर्ष 2023 में दर्ज एक महिला की एफआईआर से सामने आया था। इसके बाद जुलाई 2024 में ईडी ने उससे जुड़ी कंपनी और अन्य परिसरों पर छापेमारी की।
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Jun 12, 2026
rishu shree tender scam
ठेकेदार रिशु श्री की फ़ाइल फोटो

Bihar Tender Scam: बिहार में टेंडर माफिया और ठेकेदार रिशुश्री से जुड़े मामलों की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले वित्तीय आंकड़े सामने आ रहे हैं। विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दस्तावेजों के अनुसार, महज 13 वर्षों में उसकी आय 535 गुना बढ़ गई। वर्ष 2011-12 में उसकी सालाना आय 2.79 लाख रुपये थी, जो 2024-25 में बढ़कर 15 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। जांच एजेंसियों के मुताबिक, आय में यह असामान्य वृद्धि प्रभावशाली अधिकारियों के साथ कथित सांठगांठ, दलाली और टेंडर नेटवर्क के विस्तार से जुड़ी हो सकती है। आरोप है कि जैसे-जैसे प्रशासनिक तंत्र में उसका प्रभाव बढ़ता गया, उसकी आय में भी उसी अनुपात में तेजी से इजाफा होता गया।

सूत्रों के अनुसार,इस पूरे नेटवर्क की एक महत्वपूर्ण कड़ी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। जांच एजेंसियों का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद मामले से जुड़े कई और अहम खुलासे हो सकते हैं, जिससे इस कथित सिंडिकेट के कामकाज और नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।

दुष्कर्म केस से खुला टेंडर घोटाला

बिहार में कथित टेंडर घोटाले की परतें उस समय खुलनी शुरू हुईं, जब वर्ष 2023 में एक महिला ने पटना के रूपसपुर थाने में एक पूर्व विधायक और एक आईएएस अधिकारी पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई। इसी एफआईआर में पहली बार ठेकेदार रिशुश्री का नाम भी सामने आया था। हालांकि, बाद में आईएएस अधिकारी के खिलाफ दर्ज केस निरस्त हो गया, लेकिन जांच के दौरान टेंडर घोटाले से जुड़े कई पहलुओं पर एजेंसियों का ध्यान गया। इसके बाद 16 जुलाई 2024 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिशुश्री से जुड़ी कंपनी मेसर्स रिलायबल इंफ्रा सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय, आवास और अन्य परिसरों पर तलाशी एवं जब्ती अभियान चलाया, जिसमें कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे।

इसके बाद ईडी ने रिशुश्री से कई दौर की पूछताछ की। जांच एजेंसियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान बिहार में सरकारी ठेकों के आवंटन में कथित हेरफेर और उससे जुड़े नेटवर्क में उसकी भूमिका से संबंधित कई अहम जानकारियां सामने आईं, जिसके बाद मामले की जांच का दायरा लगातार बढ़ता गया।

Updated on:
12 Jun 2026 08:30 am
Published on:
12 Jun 2026 07:30 am
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