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Bihar Tender Scam: रिशु श्री का हाई-प्रोफाइल टेंडर सिंडिकेट बेनकाब! बड़े अफसरों को साधने के लिए मुंबई से बुलाई जाती थीं लड़कियां

Rishu Shree Tender Scam टेंडर घोटाले की जांच में रिशु श्री के नेटवर्क से कई सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई है। SVU ने तीन अधिकारियों को गिरफ्तार किया है, जबकि रिशु श्री और उसका सहयोगी पहले से जेल में हैं।

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rishu shree tender scam

ठेकेदार रिशु श्री की फ़ाइल फोटो

Rishu Shree Tender Scam बिहार में टेंडर घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच में यह संकेत मिले हैं कि इस पूरे सिंडिकेट में टेंडर माफिया और ठेकेदार रिशु श्री अकेला नहीं था, बल्कि छोटे से लेकर बड़े स्तर तक कई सरकारी अधिकारी भी इसके नेटवर्क का हिस्सा थे। स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि अधिकारियों को प्रभावित करने और अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए रिशु श्री कथित तौर पर मुंबई से हवाई मार्ग से लड़कियां बुलवाता था। सूत्रों का दावा है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

इसी मामले में बुधवार को तीन अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें भवन निर्माण विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता तारिणी दास, वित्त विभाग के संयुक्त सचिव मुमुक्षु दास और नगर विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत बुडको के कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह शामिल हैं। इन गिरफ्तारियों से पहले SVU टेंडर माफिया और ठेकेदार रिशु श्री तथा उसके सहयोगी संतोष कुमार को भी गिरफ्तार कर चुकी है। दोनों फिलहाल पटना के बेउर जेल में बंद हैं। बुधवार को गिरफ्तार किए गए तीनों अधिकारियों को पटना के विशेष निगरानी न्यायालय (स्पेशल कोर्ट) में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। SVU अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

संडे को नगर आयुक्त बन जाएंगे

स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में रिशु श्री का मोबाइल फोन सबसे अहम कड़ी बनकर उभरा है। जांच एजेंसियों ने जब उसके मोबाइल की व्हाट्सएप चैट खंगाली, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। सूत्रों के अनुसार, वित्त विभाग के संयुक्त सचिव मुमुक्षु दास सीतामढ़ी के बाद सहरसा नगर निगम का आयुक्त बनना चाहते थे। इसे लेकर उनकी रिशु श्री से व्हाट्सएप पर बातचीत हुई थी। चैट में मुमुक्षु दास की इच्छा के जवाब में रिशु श्री ने लिखा था, "संडे को आप नगर आयुक्त बन जाएंगे।" जांच में सामने आया कि इसके बाद रविवार को ही मुमुक्षु दास को सहरसा नगर निगम का आयुक्त बनाए जाने की अधिसूचना जारी कर दी गई।

जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस नियुक्ति को सुनिश्चित कराने के लिए रिशु श्री ने वरिष्ठ अधिकारियों पर करीब 25 लाख रुपये खर्च किए थे। सूत्रों का यह भी दावा है कि इस काम के लिए मुंबई से हवाई मार्ग के जरिए लड़कियों को पटना बुलाया गया था। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए स्पेशल विजिलेंस यूनिट अलग से जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, रिशु श्री के मोबाइल से मिले व्हाट्सएप चैट के आधार पर ही बुडको के कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह का नाम भी जांच के दायरे में आया। SVU अब इस पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की गहन पड़ताल कर रही है।

चैट ने खोला टेंडर कमीशन का राज

जांच एजेंसियों को रिशु श्री के मोबाइल फोन की जांच के दौरान कई अहम सुराग मिले हैं। इसी क्रम में उसके एक करीबी सहयोगी राणा की व्हाट्सएप चैट भी जांचकर्ताओं के हाथ लगी। चैट की पड़ताल में नगर विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत बुडको के कार्यपालक अभियंता (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर) उमेश कुमार सिंह का नाम सामने आया। सूत्रों के अनुसार, राणा ने एक चैट में रिशु श्री को लिखा था कि टेंडर राशि का 2.5 प्रतिशत कमीशन बुडको के एक इंजीनियर को दे दिया गया है। इसी जानकारी के आधार पर जांच एजेंसी ने उमेश कुमार सिंह के ठिकानों पर छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान कथित तौर पर एक करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे, जिसके बाद उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं।

इस पूरे मामले में अब जांच एजेंसियों की नजर आईएएस अधिकारी संजीव हंस पर है। सूत्रों का कहना है कि टेंडर घोटाले की जांच में उनकी भूमिका एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने आई है। तीन अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद से संजीव हंस कथित तौर पर जांच एजेंसियों की पहुंच से बाहर हैं। स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने बुधवार को पटना स्थित उनके सरकारी आवास और कार्यालय में छापेमारी की, लेकिन वे वहां नहीं मिले। जांच में यह भी सामने आया है कि जल संसाधन विभाग में सचिव रहने के दौरान संजीव हंस ने कथित तौर पर करोड़ों रुपये के 12 टेंडर रिशु श्री से जुड़ी कंपनियों को आवंटित किए थे। अब जांच एजेंसियां इन टेंडरों और उनसे जुड़े वित्तीय लेन-देन की गहन पड़ताल कर रही हैं।