पटना

76 साल में पहली बार कांग्रेस का सूपड़ा साफ! बिहार विधान परिषद में विधानसभा कोटे से एक भी MLC नहीं

समीर सिंह का कार्यकाल समाप्त होने के बाद विधान परिषद में कांग्रेस के केवल दो सदस्य रह जाएंगे—मदन मोहन झा और राजीव कुमार। मदन मोहन झा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से और राजीव कुमार बेगूसराय स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्र से विधान पार्षद हैं।
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Jun 10, 2026
बिहार विधान मंडल
बिहार विधान परिषद

बिहार विधान परिषद चुनाव (Bihar MLC Election 2026) में नामांकन के अंतिम दिन नौ सीटों पर नौ प्रत्याशियों और एक सीट के उपचुनाव के लिए केवल एक प्रत्याशी ने नामांकन किया। इस प्रकार 10 सीटों पर 10 प्रत्याशियों के पर्चा दाखिल करने के साथ ही निर्विरोध चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। सभी 10 प्रत्याशियों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया जाएगा।

हालांकि, 76 साल में यह पहला अवसर होगा जब विधानसभा कोटे से कोई भी विधान पार्षद नहीं पहुंचेगा। समीर कुमार सिंह विधानसभा कोटे से बिहार विधान परिषद के अंतिम सदस्य होंगे। कांग्रेस के बिहार विधानसभा में छह विधायक हैं, लेकिन इनमें से तीन राज्यसभा चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग के मामले में फंसे हुए हैं। पार्टी की ओर से इन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस मामले में केवल अनुशासन समिति और पार्टी आलाकमान के बीच संवाद जारी है।

MLC सीटों पर खाली हाथ

2010 में कांग्रेस के पास मात्र चार विधायक थे, फिर भी पार्टी ने किसी तरह एक विधान पार्षद की व्यवस्था कर ली थी। लेकिन इस बार छह विधायक होने के बावजूद कांग्रेस एक भी सीट का प्रबंधन नहीं कर पाई। 2010 में कांग्रेस ने आरजेडी के साथ बातचीत के बाद अशोक चौधरी को विधान परिषद भेजने में सफलता हासिल की थी। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि यदि इस बार भी राज्यसभा सीट के बदले विधान परिषद सीट को लेकर बातचीत होती, तो शायद कुछ नतीजा निकल सकता था। लेकिन इस बार कांग्रेस ने न तो राज्यसभा चुनाव में विशेष रुचि दिखाई और न ही विधान परिषद चुनाव में सक्रियता दिखाई। इसी कारण इस बार पार्टी का कोई भी नेता विधान परिषद नहीं पहुंच सका।

विधान परिषद में कांग्रेस कमजोर

समीर सिंह का कार्यकाल समाप्त होने के बाद विधान परिषद में कांग्रेस के मात्र दो ही सदस्य रह जाएंगे—मदन मोहन झा और राजीव कुमार। मदन मोहन झा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सदस्य हैं, जबकि राजीव कुमार बेगूसराय स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्र से विधान पार्षद हैं। मदन मोहन झा का कार्यकाल वर्ष 2026 में समाप्त होगा, जबकि राजीव कुमार का कार्यकाल वर्ष 2028 तक है।

बिहार में विधान परिषद की स्थापना वर्ष 1921 में हुई थी, लेकिन इसकी वर्तमान संरचना वर्ष 1950 में अस्तित्व में आई। उस समय परिषद की सदस्य संख्या 72 निर्धारित की गई थी। वर्ष 1958 में इसे बढ़ाकर 96 कर दिया गया, लेकिन वर्ष 2000 में झारखंड के अलग होने के बाद इसकी संख्या घटकर 75 रह गई, जो वर्तमान में भी लागू है।

Updated on:
10 Jun 2026 10:57 am
Published on:
10 Jun 2026 10:57 am