सोशल मीडिया पर मिली तेज़ी से लोकप्रियता किसी बहादुरी भरे काम या उत्कृष्ट पुलिसिंग के कारण नहीं, बल्कि रील्स और शॉर्ट्स में ‘खाकी’ वर्दी को स्टाइल के साथ पेश करने की वजह से है। अब यही वजह उनके लिए मुश्किल बन गई है और उन्हें आला अधिकारियों की सख्ती का सामना करना पड़ रहा है।
पुलिसकर्मियों द्वारा वर्दी पहनकर रील और शॉर्ट्स बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल होने की बढ़ती प्रवृत्ति ने बिहार पुलिस मुख्यालय को नाराज़ कर दिया है। ज़्यादा लाइक्स और फॉलोअर्स पाने की इस होड़ पर अब मुख्यालय ने सख़्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है।
इसी कड़ी में पूर्णिया महिला थाने की SHO शबाना आज़मी को बुधवार को सस्पेंड कर दिया गया। वह पहले भी विवादों में रह चुकी हैं, जब अपने रिश्तेदारों को थाने की कुर्सी पर बैठाने का उनका वीडियो वायरल हुआ था। उनके फेसबुक पर करीब 16 हज़ार और इंस्टाग्राम पर 2.12 लाख फॉलोअर्स हैं।
रील बनाने के मामले में यह पहला सस्पेंशन माना जा रहा है। पूर्णिया की एसपी स्वीटी सहरावत ने इसकी पुष्टि करते हुए जारी नोटिफिकेशन में कहा है, “सभी पुलिसकर्मियों को चेतावनी दी जाती है कि वे सोशल मीडिया पर रील बनाने से परहेज़ करें।”
ड्यूटी के दौरान रील और शॉर्ट्स बनाकर सोशल मीडिया का दुरुपयोग करने की कई शिकायतें मिलने के बाद बिहार पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने ऐसे 50 पुलिसकर्मियों की सूची जारी की है। इस सूची में उनके सोशल मीडिया हैंडल के लिंक और तस्वीरें भी शामिल हैं। इनमें कांस्टेबल से लेकर सब-इंस्पेक्टर रैंक तक की 28 महिला पुलिसकर्मी शामिल हैं, जो राज्य के 20 ज़िलों में तैनात हैं।PHQ ने सभी ज़िलों के SSP/SP को निर्देश दिया है कि इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का सख्ती से पालन कराया जाए।
यह मामला PHQ के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सामने आया है, जिसमें पुलिसकर्मियों को वर्दी पहनकर रील्स या निजी वीडियो बनाकर सार्वजनिक रूप से साझा करने से मना किया गया था। इसके बावजूद इस तरह की गतिविधियां जारी रहीं। असिस्टेंट इंस्पेक्टर जनरल (AIG-वेलफेयर) ने 20 अप्रैल को जारी एक पत्र के माध्यम से, बिना नाम उजागर किए, संबंधित पुलिसकर्मियों की तस्वीरों सहित एक विस्तृत सूची जारी की है। PHQ ने इस सूची के साथ संबंधित रील्स और वीडियो के लिंक भी संलग्न किए हैं, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
पत्र में AIG ने स्पष्ट किया है कि वर्दी पहनकर रील्स और वीडियो बनाना तथा उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करना निर्धारित SOP के विरुद्ध है। PHQ की मीडिया सेल की जांच में यह सामने आया है कि कई पुलिसकर्मी लगातार वर्दी में रील्स बनाकर विभिन्न प्लेटफॉर्म पर साझा कर रहे हैं, जिससे विभाग की गरिमा प्रभावित हो रही है।
PHQ द्वारा जारी सूची के अनुसार, सबसे अधिक 16 पुलिसकर्मी पटना ज़िले से हैं। मधुबनी और नालंदा से चार-चार, जबकि दरभंगा, गया, पूर्णिया, सारण, जमुई और नवादा ज़िलों से दो-दो पुलिसकर्मी शामिल हैं। इसके अलावा कटिहार, गोपालगंज, किशनगंज, सहरसा, सीतामढ़ी और मुंगेर ज़िलों से एक-एक पुलिसकर्मी का नाम सूची में है। PHQ ने स्पष्ट किया है कि विभागीय अनुशासन और वर्दी की गरिमा बनाए रखने के लिए यह कदम आवश्यक है। साथ ही सभी ज़िलों को निर्देश दिया गया है कि ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करें और SOP का सख्ती से पालन कराया जाए।
अधिकारियों का मानना है कि इस सख्ती के बाद पुलिस विभाग में सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर अनुशासन का स्पष्ट संदेश जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगेगी। “आज का दौर सोशल मीडिया का है और अधिकांश पुलिसकर्मी इसका अधिक इस्तेमाल करते हैं। वे अक्सर फोन में व्यस्त रहते हैं, जिससे सरकारी कामकाज प्रभावित होता है। फोन की इस आदत के कारण जांच अधिकारियों (IOs) का ध्यान भटकता है और उनके काम की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। यदि अधिकारी अपने कर्तव्यों पर ध्यान केंद्रित करें, तो फोन के अनावश्यक इस्तेमाल की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसलिए मोबाइल का उपयोग केवल जांच या अन्य आधिकारिक कार्यों तक ही सीमित रखा जाना चाहिए।”
बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने भी स्पष्ट कहा है कि वर्दी पहनकर रील्स बनाना न केवल अनुशासनहीनता है, बल्कि यह विभागीय नियमों का भी उल्लंघन है। दरअसल, कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा वर्दी में नाचते या अभिनय करते हुए इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब शॉर्ट्स पोस्ट किए जाने के बाद ही SOP जारी की गई थी। DGP ने पहले कहा था, “वर्दी अनुशासन, प्रतिबद्धता और समर्पण का प्रतीक है। इस तरह की गतिविधियां विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं। वर्दी में रहते हुए गैर-सम्बंधित विषयों पर रील्स बनाना और उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।”