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किसने गायब किया 132 फीट ऊंचा टॉवर? बिहार पुलिस की जांच में सामने आया 9 साल पुराना विवाद

Buxar Mobile Tower Disappearance: बिहार के बक्सर में 132 फ़ीट ऊंचा मोबाइल टावर सहित अन्य उपकरण अचानक गायब हो गए। शुरू में इसे चोरी का मामला समझा गया, लेकिन पुलिस की जांच में पता चला कि जमीन के मालिक ने कंपनी के साथ नौ साल से चल रहे विवाद के कारण उन्हें हटा दिया था।

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पटना

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Anand Shekhar

Jun 14, 2026

Buxar Mobile Tower

मोबाइल टॉवर और चोरी होने के बाद खाली जगह

Buxar Mobile Tower Mystery: बिहार के बक्सर जिले के डुमरांव थाना क्षेत्र के के वार्ड नंबर 18 में GTL का 132 फीट ऊंचा मोबाइल टॉवर, जेनरेटर और अन्य उपकरण के चोरी होने का मामला सामने आया है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जब डुमरांव पुलिस ने मामले की जांच की तो कहानी कुछ और ही निकली। पुलिस को पता चला कि यह सिर्फ़ चोरी का मामला नहीं था, बल्कि नौ साल से चल रहे एक विवाद का नतीजा था।

टॉवर रीस्टार्ट करने पहुंची टीम तो हुआ खुलासा

साल 2009 में लगाया गया GTL इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड का यह मोबाइल टॉवर तकनीकी खराबी और रखरखाव की कमी के कारण पिछले कुछ सालों से बंद पड़ा था। कंपनी की एक टेक्निकल टीम इस टॉवर को फिर से चालू करने के मकसद से बक्सर पहुंची थी। लेकिन जब तय जगह पर टीम पहुंची तो वहां से टॉवर गायब था। इतना ही नहीं टॉवर के साथ-साथ वहां लगा कीमती जनरेटर और अन्य उपकरण भी गायब थे। कंपनी के अधिकारियों ने तुरंत स्थानीय डुमरांव पुलिस स्टेशन में अज्ञात चोरों के खिलाफ FIR दर्ज कराई।

पुलिस जांच में क्या आया सामने?

शुरू में शक था कि शातिर चोरों के किसी गिरोह या कबाड़ माफिया ने कई दिनों तक गैस कटर का इस्तेमाल करके टॉवर को टुकड़ों-टुकड़ों में काटा होगा और फिर उन्हें ट्रैक्टर-ट्रॉली में लादकर भाग गए होंगे। हालांकि, जब डुमरांव थाना प्रभारी संजय कुमार सिन्हा की अगुवाई वाली पुलिस टीम ने जमीन के मालिक से सख्ती से पूछताछ की और सुरागों को जोड़ा तो धीरे-धीरे सच सामने आया। पुलिस की जांच से पता चला कि यह सिर्फ चोरी का मामला नहीं था, बल्कि कंपनी द्वारा समझौते का उल्लंघन करने और उसके कारण जमीन के मालिक की नाराजगी का नतीजा था।

पुलिस को जांच पता चला कि 2009 में टावर लगने के बाद कंपनी ने तय शर्तों के अनुसार 2017 तक जमीन के मालिक को नियमित रूप से भुगतान किया था। हालांकि, 2017 से लेकर जून 2026 तक कंपनी ने जमीन का किराया देना पूरी तरह बंद कर दिया। जमीन के मालिक ने पुलिस को बताया कि कंपनी ने उसे एक लिखित समझौते के तहत 3,000 रुपये के मासिक वेतन पर टॉवर के लिए गार्ड भी नियुक्त किया था। फिर भी, उसे सालों से गार्ड की सैलरी नहीं मिली थी। इस बीच तकनीकी खराबी के कारण टावर बंद हो गया और कंपनी का कोई प्रतिनिधि मामले को देखने नहीं आया।

जनरेटर का मिला सुराग

लंबे समय से बकाया पैसे न मिलने से परेशान होकर जमीन के मालिक ने मामला खुद अपने हाथ में ले लिया और धीरे-धीरे टावर का सामान हटाना शुरू कर दिया। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि टावर से गायब हुआ 15 KVA का मेन जनरेटर चक्की ब्लॉक में 'सोन होटल' के संचालक के पास रखा हुआ है।

पुलिस की पूछताछ में ज़मीन के मालिक ने माना कि उसने जनरेटर किसी कबाड़ी को नहीं बेचा है। बल्कि, कंपनी द्वारा लाखों रुपये का बकाया न चुका पाने के कारण, उसने अपने आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए उस कीमती जनरेटर को सुरक्षित रखने के लिए होटल ऑपरेटर को सौंप दिया था। जमीन के मालिक ने पुलिस को भरोसा दिलाया है कि वह जल्द ही जनरेटर पुलिस स्टेशन में जमा कर देगा।

छोटे उपकरण बेचे जाने की आशंका

पुलिस को जनरेटर का तो पता चल चुका है, लेकिन 132 फीट ऊंचे लोहे के ढांचे के कई हिस्सों और कुछ अन्य छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बरामदगी अभी बाकी है। पुलिस को अंदेशा है कि गुस्से में या आर्थिक तंगी के कारण कुछ छोटे और कीमती कॉपर वायर व उपकरण स्थानीय कबाड़ दुकानदारों को बेच दिए गए हैं।