राजनीति में महिलाओं के लेकर पूर्णिया सांसद पप्पू यादव द्वारा दिए गए बयान पर महिला आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने पप्पू यादव को नोटिस भेज कर जवाब मांगा है।
बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। बिहार राज्य महिला आयोग ने पप्पू यादव के उस बयान पर एक्शन लिया है, जिसमें उन्होंने महिलाओं की राजनीति में एंट्री को नेताओं के बेडरूम से जोड़ा था। आयोग ने मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए पप्पू यादव को एक औपचारिक नोटिस जारी किया है और उनसे पूछा है कि आखिर किस आधार पर उन्होंने इतनी गंभीर और अमर्यादित टिप्पणी की। आयोग ने पप्पू यादव को अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया है।
संसद में पेश किए गए 131वें संवैधानिक संशोधन विधेयक (महिला आरक्षण और परिसीमन) के संबंध में मीडिया से बात करते हुए पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि देश में महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा की सारी बातें केवल एक दिखावा हैं। उन्होंने कहा था, 'नेताओं के रूम में गए बिना 90% महिलाएं राजनीति कर ही नहीं सकतीं। बिना किसी प्रभावशाली नेता के बेडरूम तक पहुंचे महिलाओं का राजनीतिक करियर शुरू ही नहीं होता। आज औरत को नोचने की संस्कृति बन गई है।'
जैसे ही पप्पू यादव का बयान वायरल हुआ, महिला आयोग ने इसे महिलाओं की गरिमा और सम्मान पर सीधा हमला माना। आयोग द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है, 'सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहे एक वीडियो में, आपने राजनीतिक क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणियां की हैं। विशेष रूप से आपने यह दावा किया है कि राजनीति में सक्रिय महिलाओं को प्रवेश तभी मिलता है जब वे किसी न किसी राजनेता के साथ बिस्तर साझा करती हैं, यह एक ऐसा दावा है जो महिलाओं के आत्म-सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा को गहरी ठेस पहुंचाता है। इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए बिहार राज्य महिला आयोग आपसे स्पष्टीकरण की मांग करता है।'
महिला आयोग द्वारा जारी नोटिस में पप्पू यादव से कुछ सवाल के जवाब मांगे गए हैं। जैसे कि पप्पू यादव ने 90 प्रतिशत के इस आंकड़े का आधार क्या रखा है? किस प्रमाण के आधार पर पप्पू यादव ने महिला राजनेताओं के चरित्र पर सवाल उठाया? सार्वजनिक जीवन में एक सांसद जैसे गरिमामय पद पर रहते हुए ऐसी भाषा का प्रयोग करना क्या महिलाओं के अपमान की श्रेणी में नहीं आता?
बिहार राज्य महिला आयोग ने पप्पू यादव से आगे यह भी पूछा है कि इस अपमानजनक टिप्पणी के मद्देनजर लोकसभा अध्यक्ष से आपकी सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश क्यों नहीं की जानी चाहिए?
महिला आयोग द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि उपर्युक्त निंदनीय बयान के संबंध में एक स्पष्टीकरण, इस पत्र की प्राप्ति के तीन दिनों के अंदर बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष को प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य है। इस मामले को अत्यंत जरूरी माना जाए।