IPS Nitasha Gudiya: बिहार कैडर की मशहूर आईपीएस निताशा गुड़िया को केंद्र सरकार ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए आईजी (IG) पद के लिए हरी झंडी दे दी है। खास बात यह है कि केंद्र जाने वाले अफसरों में निताशा गुड़िया के आईपीएस पति सत्यवीर सिंह भी शामिल हैं, यानी अब दोनों पति-पत्नी एक साथ केंद्र में आईजी का पद संभालेंगे।
IPS Nitasha Gudiya: केंद्र सरकार ने बिहार कैडर के छह तेज-तर्रार IPS अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए चुना है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने छह नामों को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है, जिनमें उपेंद्र कुमार शर्मा, सत्यवीर सिंह, विकास बर्मन, निताशा गुड़िया, किम और मनोजय कुमार शामिल हैं। इन अधिकारियों को केंद्र में इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IG) या उसके समकक्ष पद पर तैनात किया जाएगा। ये सभी अधिकारी 2008 बैच के हैं। इनमें से IPS अधिकारी निताशा गुड़िया ने बिहार के कई बड़े और बेहद संवेदनशील जिलों में पुलिस अधीक्षक के तौर पर काम करते हुए ऐसी साख बनाई है, जिसे अपराधी आज भी नहीं भूल पाए हैं।
आईपीएस निताशा गुड़िया के कार्यकाल की सबसे चर्चित कहानी भागलपुर की है, जिसे आज भी लोग मिसाल के तौर पर याद करते हैं। जनवरी 2017 में भागलपुर के वीआईपी इलाके (एमपी द्विवेदी रोड) में एक बमबाजी की घटना हुई थी, जिसका मुख्य आरोपी और कुख्यात अपराधी तनवीर लंबे समय से फरार चल रहा था। जून 2021 में इस शातिर अपराधी का दुस्साहस इतना बढ़ गया कि उसने फेसबुक पर भागलपुर पुलिस को टैग करते हुए खुला चैलेंज दे डाला। उसने पुलिस को ललकारते हुए कहा कि हिम्मत है तो पकड़कर दिखाओ।
उस समय भागलपुर पुलिस की कमान निताशा गुड़िया के हाथों में थी। उन्होंने इस अपराधी के घमंड को चूर करने की ठान ली और खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया, वैज्ञानिक तरीकों से अपराधी की पल-पल की लोकेशन ट्रेस की और बिहार से सैकड़ों किलोमीटर दूर महाराष्ट्र के नागपुर से तनवीर को उसके घर में घुसकर दबोच लिया और उसे भागलपुर लेकर आईं।
निताशा गुड़िया के काम करने का अंदाज फाइलों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वे खुद ग्राउंड पर उतरने के लिए जानी जाती हैं। बेतिया में पुलिस अधीक्षक (SP) के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान, लालूनगर औद्योगिक इलाके से एक बिना सिर वाली लाश बरामद हुई थी। रातों-रात इस मामले ने सांप्रदायिक रंग ले लिया। पीड़ित के पिता ने स्थानीय नामी कारोबारियों और नगर परिषद के अध्यक्ष पर सीधे तौर पर हत्या का आरोप लगाया, जिससे हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि पूरे शहर में दंगे भड़कने का खतरा पैदा हो गया।
सामाजिक सौहार्द को बिगड़ने से बचाने के लिए एसपी निताशा गुड़िया ने केस के जांच की कमान खुद संभाली। जब मामले की बारीकी से जांच हुई, तो पता चला कि यह पूरी कहानी मनगढ़ंत थी और असली हत्यारा दिल्ली में छिपा बैठा है। निताशा गुड़िया तुरंत अपनी टीम के साथ दिल्ली रवाना हुईं और मुख्य आरोपी खालिद को दबोचकर बेतिया ले आईं, जिसके बाद शहर में शांति बहाल हो सकी।
उत्तर प्रदेश के हरदोई की बहु और मूल रूप से देश की राजधानी दिल्ली की रहने वाली निताशा गुड़िया का बैकग्राउंड बेहद शानदार रहा है। उनके पिता इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) में कार्यरत थे। निताशा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) से ग्रेजुएशन करने के बाद देश के सबसे प्रतिष्ठित सामाजिक संस्थान टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई से मास्टर की डिग्री हासिल की। उच्च शिक्षित होने के कारण उनका अपराधियों से निपटने का तरीका बेहद आधुनिक और वैज्ञानिक होता है।
केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई इस हाई-प्रोफाइल लिस्ट में एक और बेहद दिलचस्प संयोग देखने को मिला है। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए चुने गए 2008 बैच के छह आईपीएस अधिकारियों में सत्यवीर सिंह का नाम भी शामिल है। आईपीएस सत्यवीर सिंह कोई और नहीं, बल्कि निताशा गुड़िया के पति हैं। दोनों ने एक ही बैच से भारतीय पुलिस सेवा पास की और बिहार कैडर में रहते हुए अपनी मजबूत छवि बनाई। अब ये दोनों पति-पत्नी एक साथ दिल्ली में भारत सरकार के अधीन आईजी के पद पर अपनी सेवाएं देंगे, जो पूरे बिहार पुलिस महकमे के लिए गर्व की बात है।